कोन वन रेंज के अंतर्गत वन माफियायों द्वारा अबैध खनन व अबैध कब्जा को लेकर वन विभाग के खिलाफ अंतर्राजीय सीमा पर जोरदार प्रदर्शन व स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश
कोन वन रेंज के अंतर्गत वन माफियायों द्वारा अबैध खनन व अबैध कब्जा को लेकर वन विभाग के खिलाफ अंतर्राजीय सीमा पर जोरदार प्रदर्शन व स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश।

वन विभाग द्वारा अंतर्राजीय सीमा विवाद सुलझाने के साथ साथ अबैध खनन /कब्जा रोकने में विफल- पूर्व एंटी करप्शन अध्यक्ष चोपन।
राजेश तिवारी (संवाददाता)
कचनर वा (कोन/सोनभद्र) – ओबरा वन प्रभाग के कोन वन रेंज के अंतर्गत वन माफियायों व भूमाफियाओं की सक्रियता इस कदर बढ़ गयी है कि वन माफियायों द्वारा अबैध बालू खनन /परिवहन के साथ साथ वन भूमि पर दबंगों द्वारा अबैध कब्जा करने का सिलसिला अन वरत जारी है। इसी क्रम में बतातें चलें कि विंदमगंज वन रेंज के घिचोरवा वन चौकी व ग्राम पंचायत बौधाडीह करहिया औरा डंडी, से सट कर बहने वाली कनहर नदी व अन्य छोटे छोटे पहाड़ी नदियों से बालू खनन करके रात्रि में कोन वन रेंज के भालुकूदर् सेक्शन के धरनवां के वाल, पीपर खाड, कुड़वा, नरोईयादामर्, बरवाही खोली, बडाप्, कचनर वा, बागे सोती, होते हुए झारखंड व करैल, रामगढ़, आदि स्थानों पर रात्रि में टीपर् द्वारा बालू का बेखौफ परिवहन किया जाता है। सूत्र बतातें हैं कि वन माफियायों का सिंडिकेट इतना तगड़ा है कि किसी विभाग की तरफ से छापामारी को लेकर सूचना इन माफियायों तक आसानी से पहुँच जाता है व माफियायों द्वारा हर एक इंट्री पॉइंट पर जगह जगह वाहन लेकर कई अन्य साथियों सहित भ्रमण करते नजर आते हैं जिसे अबैध बालू परिवहन करने में कोई समस्या न हो वहीं दूसरी ओर ओबरा वन प्रभाग के वन रेंज कोन के भालुकूदर् सेक्शन व बागे सोती सेक्शन में सेकडों एकड़ वन भूमि पर कब्जा कर लिया गया है जिसका जीता जागता उदाहरण भालुकूदर् के धरनवां बॉर्डर के पास व बागे सोती सेक्शन में कचनर वा वन चौकी से पूरब पथलकुद् वा, बड़ाप्, बरवाही खोली, करैल असना बांध बॉर्डर, डुमर्, बागे सोती के खोहइया जंगल आदि पर वन विभाग की उदासीनता के कारण सेकडों एकड़ वन भूमि पर कब्जा कर लिया गया व दूसरी ओर झारखंड वासियों के द्वारा अंतर्राजीय सीमा उत्तर प्रदेश व झारखंड बागे सोती व पाटगढ़ (गरबा न) लोदघाट व बड़ाप् -झारखंड कुम्बा खुर्द (नगर उन्टारी) पर उत्तर प्रदेश के वन सीमा के अंदर घुसकर जबरन कब्जा कर घर तक बना लिया गया जिसके संबंध में पूर्व में स्थानीय लोगों द्वारा समय समय पर विभाग को अवगत कराया जा चुका है फिर भी विभाग द्वारा किसी भी प्रकार की प्रभावी कदम उठाया न जा सका बल्कि तमाश विन बन कर तमाशा देखते रहे व कागजी कोरम समय समय पर पूरा करते रहे जिसका आलम यह रहा कि वन भूमि पर कब्जा करने के साथ साथ अबैध बालू परिवहन करने का सिलसिला बदस्तुर् जारी रहा वहीं दूसरी ओर माफियायों के हौसले बुलंद हैं। इससे स्पस्ट प्रतीत होता है कि वन विभाग की भूमिका स्वत:ही जाँच के घेरे में है। इस संबय में वरिस्ट समाजसेवी जोखन प्रसाद यादव ने माननीय मुख्यमंत्री जी व संबंधित विभाग के उच्चधिकारियोँ व झारखंड सरकार के अधिकारियों से मांग किया है कि दोनों प्रदेशों के अधिकारियों द्वारा संयुक्त बैठक कर सीमा विवाद को हल करें ताकि दोनों प्रदेशों के बीच आपसी प्रेम व सौहार्द बरकरार रहे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संबंधित विभाग के अधिकारी वन चौकी पर न रहकर अन्यत्र निवास करते हैं व शिकायत करने पर फर्जी केश में फँसाने तक की धमकी दी जाती है जिसे ग्रामीणों में काफी आक्रोश ब्याप्त है। उपरोक्त विंदुओं को लेकर आज उत्तर प्रदेश व झारखंड सीमा पर जोरदार प्रदर्शन किया गया और माननीय मुख्यमंत्री जी से उपरोक्त तथ्यों को जाँच कराकर स्वत:संज्ञान में लेते हुए त्वरित निस्तारण की मांग है। प्रदर्शन करने वालों में मुख्य रूप से जोखन प्रसाद यादव, अमर्केश यादव, मुरलीधर पांडेय, बालमुकुंद पांडेय, हरीलाल सिह, उदय प्रजापति, संतलाल, नन्हकु राम, मुन्नी लाल , बृजकिशोर, विहारी प्रसाद आदि लोग थे।
