बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि वह इसी साल अपने मुल्क लौटेंगी

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि वह इसी साल अपने मुल्क लौटेंगी। इस बात का ऐलान उन्होंने एनडीटीवी को दिए एक ईमेल इंटरव्यू में कहीं। शेख हसीना को अपने ही देश में मौत की सजा सुनाई गई है।

उनके खिलाफ बांग्लादेश में ही कई मुकदमे चल रहे हैं, जहां की पांच बार प्रधानमंत्री रहीं।

शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़े लगभग दो साल हो गए हैं। एक ऐसा देश जिसका गठन उनके पिता मुजीबुर रहमान ने पाकिस्ता ने अलग करके किया था। उन्होंने कहा कि मेरी पार्टी सिर्फ एक संगठन नहीं है बल्कि फोर्स है।

उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों पर हमला तो बांग्लादेश की आजादी पर भी हमला है। 23 जून को ही उनकी पार्टी अवामी लीग का स्थापना दिवस था। इस मौके पर बांग्लादेश में अवामी लीग के दर्जनों कार्यकर्ताओं को अरेस्ट किया गया था।

बांग्लादेश वापसी पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में शेख हसीना ने कहा कि मेरी वापसी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का सवाल नहीं है। यह बांग्लादेश के लोगों के राजनीतिक अधिकारों, लोकतंत्र की बहाली, कानून के शासन और मुक्ति संग्राम की भावना से जुड़ा विषय है। मैं सत्ता के लिए राजनीति नहीं करती, बल्कि देश के लोगों के कल्याण और राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के ‘सोनार बांग्ला’ के सपने को साकार करने के लिए राजनीति करती हूं।

शेख हसीना ने कहा कि मेरे खिलाफ दिया गया फैसला न्याय नहीं है, बल्कि एक अवैध, असंवैधानिक और राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रक्रिया का हिस्सा है। न्यायपालिका को राजनीतिक प्रतिशोध का हथियार बना दिया गया है ताकि अवामी लीग को नेतृत्वविहीन किया जा सके। ऐसे प्रयास पहले भी हुए हैं और असफल रहे हैं।

हसीना ने कहा कि वह मौत से नहीं डरती। 1975 में मैंने अपने माता-पिता, अपने भाइयों और लगभग अपने पूरे परिवार को खो दिया। 21 अगस्त को ग्रेनेड से मेरी हत्या की कोशिश की कई। मेरे विरुद्ध अनेक षड्यंत्र रचे गए। परन्तु हर षड्यंत्र को तोड़ते हुए मैं बांग्लादेश की जनता के साथ खड़ी रही।

उन्होंने कहा कि जनता के मत से मैं पांच बार प्रधानमंत्री चुनी गई और देश के अभूतपूर्व विकास के लिए कार्य किया। मेरा लगभग पूरा जीवन बांग्लादेश की जनता, अवामी लीग, लोकतांत्रिक संघर्ष और बांग्लादेश के विकास से जुड़ा रहा है। इसलिए मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि हर बाधा और हर षड्यंत्र को पार करते हुए मैं इस वर्ष अपने देश लौटूंगी।

एक अन्य सवाल के जवाब में शेख हसीना ने कहा कि अवामी लीग कोई कागजी संगठन नहीं, बल्कि बंगाल की मिट्टी, इतिहास और जनता से जुड़ी एक राजनीतिक शक्ति है। 77 साल के इतिहास में इस पार्टी पर कई बार हमले हुए, इसे प्रतिबंधित किया गया, लेकिन हर बार यह जनता की ताकत से वापस उभरी। अवामी लीग की वापसी किसी और की असफलता पर निर्भर नहीं करती। जनता का समर्थन हमेशा हमारे साथ रहा है। हमारे शासन में देश में स्थिरता, विकास और सुरक्षा थी, लेकिन विरोधी ताकतों ने सुनियोजित तरीके से लोगों के एक हिस्से को गुमराह कर हमें सत्ता से हटाया।

शेख हसीना ने कहा कि आज लोग देख रहे हैं कि अंतरिम सरकार और बाद में बनी BNP सरकार के दौर में लोकतंत्र, कानून-व्यवस्था और आर्थिक स्थिरता कमजोर हुई है। अल्पसंख्यक असुरक्षित हैं, कट्टरवाद बढ़ रहा है और अवामी लीग के नेताओं-कार्यकर्ताओं पर दमन हो रहा है। लोग तुलना करना जानते हैं और समझते हैं कि अवामी लीग के शासन में देश अधिक सुरक्षित और स्थिर था।

पार्टी को लेकर पूछ गए सवाल पर शेख हसीना ने कहा कि अवामी लीग की राजनीतिक वापसी किसी सरकार की कृपा पर निर्भर नहीं है। पार्टी कार्यालय बंद किए जा सकते हैं, राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकती है, लेकिन लोगों के दिलों से अवामी लीग को नहीं मिटाया जा सकता।

उन्होंने कहा कि देशभर में विभिन्न जिलों, उपजिलों और गांवों में अवामी लीग के समर्थन में रैलियां निकल रही हैं। आम लोग भी इन कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं। यह पार्टी के फिर से उभरने का संकेत है। मौजूदा सरकार खुद अवामी लीग की संगठनात्मक ताकत से डरती है। यही कारण है कि पार्टी के स्थापना दिवस कार्यक्रमों को रोकने के लिए सेना, सीमा रक्षक बल और पुलिस को तैनात किया गया, लेकिन अवामी लीग को बल प्रयोग से दबाया नहीं जा सकता।

शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश का जन्म सैन्य शासन, भेदभाव, दमन और सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ संघर्ष से हुआ था। हमारे संविधान की नींव राष्ट्रवाद, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता पर आधारित थी। इस आधार को कमजोर करना बांग्लादेश की मूल पहचान पर हमला है।

उन्होंने कहा कि 5 अगस्त के बाद मुक्ति संग्राम की भावना पर व्यापक हमला हुआ। स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान किया गया, स्मारकों को नुकसान पहुंचाया गया, “जय बंगला” के नारे को अपराध की तरह देखा गया और राष्ट्रपिता के निवास पर हमले हुए। अल्पसंख्यकों, मंदिरों, सूफी दरगाहों और सांस्कृतिक संस्थानों को निशाना बनाया गया। चरमपंथ के लिए जगह बनाई गई। यह सब बांग्लादेश को एक विफल राज्य की दिशा में ले जा रहा है।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके विपरीत, अवामी लीग के शासनकाल में बांग्लादेश ने उल्लेखनीय आर्थिक प्रगति की। 2023 में जीडीपी वृद्धि दर 7.25 प्रतिशत रही, प्रति व्यक्ति आय 2,793 डॉलर तक पहुंची और देश विश्व की 35वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना। गरीबी और अत्यधिक गरीबी में उल्लेखनीय कमी आई, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ तथा पद्मा ब्रिज, मेट्रो रेल और डिजिटल बांग्लादेश जैसे बड़े विकास कार्य हुए।

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों और मंदिरों पर हमले पर शेख हसीना ने कहा कि यह बेहद दुखद और चिंताजनक है। जब भी मुक्ति संग्राम की ताकतें कमजोर हुई हैं और सांप्रदायिक शक्तियों का प्रभाव बढ़ा है, तब अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़े हैं। 5 अगस्त के बाद हिंदू, बौद्ध, ईसाई, आदिवासी, अहमदिया समुदाय और सूफी परंपराओं से जुड़े लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। मंदिरों में तोड़फोड़ हुई है, घर लूटे गए हैं और धार्मिक आयोजनों में बाधाएं पैदा की गई हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि सरकार इन घटनाओं को नकारती रही है, जिससे अपराधियों का हौसला बढ़ा है।

शेख हसीना ने कहा कि मैं स्पष्ट कहना चाहती हूं कि अल्पसंख्यक कोई वोट बैंक नहीं हैं, बल्कि बांग्लादेश के बराबरी के अधिकार वाले नागरिक हैं, जो लोग मंदिरों पर हमला करते हैं और धर्म के नाम पर लोगों को धमकाते हैं, वे केवल किसी एक समुदाय के नहीं, बल्कि बांग्लादेश की स्वतंत्रता की भावना के दुश्मन हैं।

भारत में निर्वासन के दौरान आपका जीवन कैसा रहा है? इस सवाल पर शेख हसीना ने कहा कि मेरे जीवन में निजी जीवन जैसी कोई चीज बहुत कम रही है। मैंने अपना पूरा जीवन बांग्लादेश के लोगों के लिए समर्पित किया है। 1975 में मैंने सब कुछ खो दिया था और लंबे समय तक निर्वासन में रही। बाद में देश लौटकर लोकतंत्र की लड़ाई लड़ी।

उन्होंने कहा कि आज भी मेरे परिवार से सामान्य संपर्क बना हुआ है, लेकिन मेरा दिल बांग्लादेश में ही है। वहीं मेरी मिट्टी है, वहीं मेरे पिता की यादें हैं और वहीं वह जनता है जिसकी मैंने पूरी जिंदगी सेवा की है। देश से दूर रहना और अपने सहयोगियों तथा समर्थकों के उत्पीड़न की खबरें सुनना बेहद पीड़ादायक है। फिर भी मेरा संघर्ष रुका नहीं है। मैं रोजाना देश की स्थिति पर नजर रखती हूं, लोकतंत्र और मानवाधिकारों के मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने उठाने की कोशिश करती हूं। मुझे विश्वास है कि बांग्लादेश की जनता फिर से लोकतंत्र बहाल करेगी और अवामी लीग जनता की ताकत से दोबारा उभरेगी। मैं अंतिम दिन तक इस संघर्ष के साथ रहूंगी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “चल रही न्यायिक और आंतरिक कानूनी प्रक्रियाओं के तहत एक अनुरोध (शेख हसीना के प्रत्यर्पण) की जांच की जा रही है। हम सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ इस मुद्दे पर रचनात्मक रूप से बातचीत जारी रखेंगे।

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