मध्यम वर्ग को 440 वोल्ट का झटका! वो 5 बड़ी उम्मीदें, जिन्हें निर्मला सीतारमण ने बजट में तोड़ा

1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब बजट पेश करने जा रही थीं, तो आम आदमी बड़ी हसरत से अपने वित्त मंत्री को देख रहा था। मिडिल क्लास को उम्मीद थी कि टैक्स में छूट मिलेगी, तो किसानों को उम्मीद थी कि उनकी कुछ बेहतरी होगी और सबसे ज्यादा उम्मीद तो उन पांच राज्यों के करोड़ों लोगों को थी, जहां विधानसभा के चुनाव होने हैं।

लेकिन जब वित्त मंत्री का बजट भाषण खत्म हुआ तो आम आदमी के साथ ही चुनावी राज्यों के लोगों को भी जोर का झटका लगा, क्योंकि उम्मीद की बात तो छोड़िए उनका कहीं जिक्र भी नहीं हुआ। आज बात उन पांच उम्मीदों की, जिन्हें बजट भाषण में तोड़ दिया गया।

इनकम टैक्स में छूट

पिछले बजट में वित्त मंत्री ने इनकम टैक्स में जितनी बड़ी छूट दी थी और इनकम टैक्स की लिमिट को 12 लाख रुपये तक कर दिया था। उसे देखते हुए उम्मीद थी कि इस बार भी बजट में कुछ छूट मिलेगी और लिमिट 12 लाख से बढ़कर 13 या 14 लाख तक पहुंच जाएगी। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

कोई बात भी नहीं हुई इनकम टैक्स पर और नतीजा ये हुआ कि करदाता निराश हो गया। उम्मीद ये भी थी कि न्यू टैक्स रिजीम में ही कुछ ऐसा बदलाव आएगा कि आम आदमी को टैक्स में कुछ छूट मिल जाएगी। पीपीएफ, एनपीएस या ईएलएसएस में निवेश पर लोग छूट की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन वित्त मंत्री ने इसकी कोई बात भी नहीं की।

किसानों के लिए स्पेशल पैकेज

बजट में उम्मीद थी कि किसानों के लिए कोई नई योजना आएगी। अगर कोई नई योजना नहीं भी आई तो कुछ और फसलों को एमएसपी के दायरे में लाने की उम्मीद थी। उम्मीद ये भी थी कि प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत मिलने वाले पैसे में कुछ बढ़ोतरी होगी। क्योंकि पिछले 6 साल से योजना की राशि में कोई बदलाव नहीं हुआ है. खाद-बीज पर सब्सिडी और कम ब्याज पर कर्ज और पुरानी कर्ज माफी की उम्मीद थी। हालांकि, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

रोजगार के लिए विशेष योजना

बजट में उम्मीद थी कि युवाओं के रोजगार के लिए कोई स्पेशल स्कीम लॉन्च की जाएगी. हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ. अलग-अलग योजनाओं के जरिए रोजगार के सृजन की बात हुई, डाटा सेंटर के जरिए रोजगार बढ़ाने की बात हुई, स्कूलों में कॉन्टेंट क्रिएशन की बात हुई, कुछ इंटर्नशिप और स्किल की बात हुई लेकिन कोई एक ऐसी योजना नहीं आई जिसमें अभी के बेरोजगारों को रोजगार के लिए प्रेरित किया जा सके.

सीनियर सिटीजन को छूट

बजट में उम्मीद थी कि सीनियर सिटीजन के लिए कोई बीमा योजना आएगी या फिर रेलवे के टिकट में रियायत दी जाएगी. कोई नई योजना आएगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. सीनियर सिटीजन के लिए टीडीएस कटौती भी नहीं बदली और वो भी पुरानी ही रह गई.

चुनावी राज्यों को सौगात

बजट में सबसे ज्यादा उम्मीद उन पांच राज्यों के लोगों को थी, जहां विधानसभा के चुनाव हैं. खास तौर से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के लोग तो उम्मीद लगाए ही बैठे थे। असम, केरल और पुडुचेरी के लोगों को भी स्पेशल पैकेज या स्पेशल इंसेंटिव या किसी तरह की कोई डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा कुछ अलग से नहीं हुआ। रेलवे कॉरिडोर सिलिगुड़ी को मिला है।

नया फ्रेट कॉरिडोर बनाने की घोषणा

में बंगाल के डांकुनी से गुजरात के सूरत तक एक नया फ्रेट कॉरिडोर बनाने की घोषणा हुई है। तमिलनाडु उन 4 राज्यों में शामिल है जहां ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’ बनाया जाएगा। नारियल, काजू और कोको उत्पादकों के लिए विशेष योजनाएं शुरू की गई हैं, जिसका सीधा लाभ तमिलनाडु के तटीय जिलों को मिलेगा। लेकिन जिस तरह की योजनाएं बिहार के लिए देखने को मिली थीं, वैसी कोई योजना इन चुनावी राज्यों को नहीं मिली।

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