सोनभद्र में शिक्षा के नाम पर बड़ा खेल!
सोनभद्र में शिक्षा के नाम पर बड़ा खेल!

अवैध विद्यालय, अनट्रेंड शिक्षक और अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल
हाई स्कूल–इंटर तक पढ़ाई, मान्यता सिर्फ 5 या 8 तक!
बिना भवन, बिना प्रशिक्षित शिक्षक – फिर भी धड़ल्ले से फीस वसूली
सोनभद्र (उत्तर प्रदेश)।
सोनभद्र जनपद में स्कूली शिक्षा के नाम पर चल रहे कथित व्यवसायिक नेटवर्क ने शिक्षा व्यवस्था की जड़ों को हिला कर रख दिया है। जिले में कई दर्जन ऐसे विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जिनकी मान्यता सिर्फ कक्षा 5 या 8 तक है, लेकिन इनमें हाई स्कूल और इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई खुलेआम कराई जा रही है।
स्थानीय अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े लोगों का आरोप है कि यह सब शिक्षा नहीं, बल्कि संगठित व्यापार बन चुका है, जिसमें विद्यालय संचालकों से लेकर शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों तक की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।
90% प्राइवेट विद्यालयों में अनट्रेंड शिक्षक!
सूत्रों के अनुसार, जनपद के लगभग 90 प्रतिशत मान्यता प्राप्त विद्यालयों में प्रशिक्षित (ट्रेंड) शिक्षकों की भारी कमी है।
बीएड, डीएलएड जैसे अनिवार्य प्रशिक्षण के बिना ही शिक्षकों को नियुक्त कर लिया गया है, जो आरटीई एक्ट और यूपी बेसिक शिक्षा नियमावली का खुला उल्लंघन है।
विद्यालय भवन मानकों की भी अनदेखी
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि
अधिकांश विद्यालयों में न्यूनतम भूमि मानक पूरा नहीं है
शौचालय, पेयजल, खेल मैदान, सुरक्षित भवन जैसी बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं
अग्नि सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के कोई इंतजाम नहीं
इसके बावजूद इन विद्यालयों को संरक्षण प्राप्त होने का आरोप लगाया जा रहा है।
शीतावकाश में भी पढ़ाई!
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शासन द्वारा घोषित शीतावकाश के दौरान भी कई विद्यालयों में नियमित कक्षाएं संचालित की गईं, जो स्पष्ट रूप से आदेशों की अवहेलना है।
यह सवाल खड़ा करता है कि इन विद्यालयों को किसका संरक्षण प्राप्त है?
जिला विद्यालय निरीक्षक और शिक्षा अधिकारियों पर सवाल
जब इस पूरे मामले पर जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) से सवाल किए जाते हैं तो उनका जवाब होता है
जब मामला संज्ञान में आएगा, तब कार्रवाई की जाएगी।”
जबकि आरोप लगाने वालों का कहना है कि यह खेल वर्षों से सबकी जानकारी में चल रहा है।
वहीं *बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और जिले के खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) पर भी गंभीर आरोप* लगाए जा रहे हैं कि
वे अवैध विद्यालयों के संचालन को नजरअंदाज कर रहे हैं
निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित है
कथित रूप से मिलीभगत और भ्रष्टाचार के बिना यह संभव नहीं
कौन-कौन से कानूनों का उल्लंघन?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला कई गंभीर कानूनों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है—
आरटीई अधिनियम 2009 (Right to Education Act)
धारा 18: बिना मान्यता विद्यालय चलाना दंडनीय अपराध
धारा 19: विद्यालय भवन व संसाधनों के मानक अनिवार्य
यूपी बेसिक शिक्षा नियमावली
प्रशिक्षित शिक्षकों की अनिवार्यता
छात्र-शिक्षक अनुपात का पालन
भारतीय दंड संहिता (IPC)
धारा 420: धोखाधड़ी
धारा 120B: आपराधिक षड्यंत्र (यदि मिलीभगत सिद्ध होती है)
*उच्चस्तरीय बाहरी जांच की मांग*
शिक्षा और सामाजिक लोगों की मांग है कि—
पूरे प्रकरण की बाहरी *एजेंसी/एसआईटी से उच्चस्तरीय जांच* कराई जाए
शिक्षा अधिकारियों की चल-अचल संपत्तियों की जांच हो
दोषी विद्यालयों की मान्यता तत्काल निरस्त की जाए
जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय व आपराधिक कार्रवाई हो
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर निष्पक्ष जांच हुई तो बहुत बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है।
सबसे बड़ा सवाल
क्या सोनभद्र के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई होगी?
या फिर शिक्षा के नाम पर चल रहा यह कथित व्यवसाय ऐसे ही फलता-फूलता रहेगा?
इस ओर माननीय मुख्यमंत्री जी का ध्यान आकृष्टनिय है।
