पुतिन के साथ उनकी ‘अदृश्य सेना’, जानें क्या है SBP जिसके 3000 सैनिक पहुंचे दिल्ली

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज भारत आ रहे हैं. वे दो दिन भारत में रहेंगे. रूसी राष्ट्रपति की सुरक्षा का जिम्मा प्रेसिडेंशियल सिक्योरिटी सर्विस के ऊपर है. इसे एसबीपी भी कहा जाता है.
एसबीपी एक केंद्रीय एजेंसी है, जो रूसी राष्ट्रपति के साथ-साख रूस के प्रधानमंत्री, उनके परिवारों अधिकारिक निवास की सुरक्षा का जिम्मा संभालती है.
मुख्य विशेषताएं जिम्मेदारियां
एसबीपी रूस की सबसे खुफिया सेवाओं में से एक है. ये फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस की एक खुफिया यूनिट है. इसका प्राथमिक कार्य रूस के शीर्ष नेताओं उनके परिवार को संभावित खतरे से बचाना है. इनके पास भोजन की तैयारी की जांच परिसर की सफाई की निगरानी भी शामिल है. एसबीपी के अंदर एक मनोवैज्ञानिक सुरक्षा विभाग है. ये विभाग राष्ट्रपति के खतरों की बारे में जानकारी इकट्ठा करता है. एसबीपी की स्थापना सोवियत यूनियन के वक्त के केजीबी के नौवें मुख्य निदेशालय से हुई है.
एजेंसी में दो से तीन हजार बिना वर्दी वाले कर्मचारी
एसबीपी के कर्मचारी अधिकांश सादे कपड़ों में होते हैं, जो आम आदमियों के बीच में घुलमिल जाते हैं. एजेंसी में करीब-करीब दो हजार से तीन हजार गैर वर्दीधारी कर्मचारियों के बीच हो सकते हैं. जब राष्ट्रपति कहीं भी यात्रा करते हैं तो एसबीपी उस स्थान के आतंकवाद, अपराध, धार्मिक परिदृश्य का गहराई विरोध का अध्ययन करती हैं. वे साथ ही सुरक्षित कम्युनिकेशन लाइनें स्थापित करती है.
रूसी सिक्योरिटी सिस्टम का अहम हिस्सा
एसबीपी रूसी सिक्योरिटी सिस्टम का बहुत शक्तिशाली गुप्त हिस्सा है. एसबीपी राष्ट्रपति की शारीरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर काम करती है.
