एक साथ उठी पांच अर्थियों,खाटू श्याम जा रहे इंजीनियर का पूरा परिवार हादसे में खत्म

लखनऊ। एक साथ पांच अर्थियों का उठना। इनमें वृद्ध माता-पिता के शव थे, तो युवा पुत्र- बहू और नन्ही बच्ची के भी। यह देख मुसाहिबगंज अपने आंसू नहीं रोक पा रहा था।
केवल मुसाहिबगंज नहीं, आसपास के क्षेत्रों में जिसने भी सुना सत्यप्रकाश के घर दौड़ पड़ा। बड़ी बहू और बड़े पुत्र को सबने ढांढस बंधाया। साथ ही नियति की क्रूरता से उबरने की हिम्मत दी।
खाटू श्याम जाते वक्त रविवार सुबह मुसाहिबगंज निवासी सत्यप्रकाश, उनकी पत्नी रामदेवी, बेटे अभिषेक, बहू प्रियांशी और सात महीने की बच्ची श्री की मौत हो गई थी। सभी के शव सोमवार तड़के घर पहुंचे। आठ बजने तक गली में पैर रखने की जगह तक नहीं थी।
बेसुध होकर गिर पड़ी देवरानी
उधर, बड़ी बहू ज्योति, चचेरी बहू रीता सिंह समेत अन्य लोगों को जब आखिरी बार सभी मृतकों का चेहरा दिखाया गया तो फफख पड़ीं। वहीं देवरानी शव से लिपटकर रोते हुए कहने लगी भाभी उठो। इस तरह चली जाओगी कहते हुए रोने लगी और बेसुध होकर गिर पड़ी।
उधर, सत्यप्रकाश के स्वभाव को सभी इतना पसंद करते थे कि मुस्लिम समाज के लोग भी भारी संख्या में अंतिम यात्रा में शामिल हुए। वहीं, मृतक सत्यप्रकाश का पोता जीयांशु सभी के शव देख रो पड़ा। बार-बार अपनी मां से कहता रहा कि दादा-दादी तो छोड़कर चले गए, आप मेरे साथ रहो।
इसके बाद हिमांशु, चाचा चंद्र प्रकाश समेत अन्य लोगों ने एक-एक कर कंधा देकर सभी शव को उठाकर गुलाला घाट की तरफ बढ़े तो परिवारीजन की चीखों से इलाका गूंज उठा। एक तरफ जहां श्री के शव को घर के पास दफनाया गया, तो वहीं गुलाला घाट में सभी का अंतिम संस्कार किया गया।
आखिरी बार सभी ने श्री के शव को गोद में लिया
सात महीने की श्री की मौत का किसी को विश्वास नहीं हो रहा था। हर कोई अपनी गोद में लेकर बार-बार उसका चेहरा निहार रहे थे। अभी रो देगी, फिर खिलौने से भरे झूले में बैठा देंगे, लेकिन वह नहीं उठी और खिलौने से भरा झूला वैसे ही सूना रह गया। बार-बार सब यही कह रहे थे कि भगवान इस बच्ची का क्या कसूर था?
ऑफिस जाने के लिए बुलाना पड़ेगा
अंतिम यात्रा में शामिल परिवारीजन रोते-बिलखते हुए कहने लगे, सबको कहां ले जा रहे हैं। प्रियांशी को आफिस जाना है, अभिषेक को भी काम है। वह लोग जा रहे हैं, लौटकर नहीं आएंगे। उनको बुलाने जाना पड़ेगा। यह देख सभी रोने लगे।
यह था मामला
मुसाहिबगंज निवासी साफ्टवेयर इंजीनियर अभिषेक सिंह ने तीन दिन की छुट्टी ली थी। फिर शनिवार को बैंक मैनेजर पत्नी प्रियांशी, पिता सत्यप्रकाश, मां रामा देवी और सात महीने की बच्ची श्री के साथ को मैनपुरी बहन सिंपल के बेटे का जन्मदिन मनाने के लिए गए थे। वहां से सभी का खाटू श्याम जाने का कार्यक्रम बन गया और देर रात निकल पड़े। रविवार सुबह जयपुर के दौसा जिले के मनोहरपुर मोड़ पर ट्रेलर की टक्कर से सभी की मौत हो गई थी।
