जम्मू कश्मीर के बडगांव में आतंकियों ने दो मजदूरों की गोली मार दी

जम्मू कश्मीर के बडगांव में आतंकियों ने दो मजदूरों की गोली मार दी। यह घटना शुक्रवार को सामने आई है, पिछले 12 दिन के भीतर इस तरह की यह दूसरी घटना है, जब किसी बाहरी को आतंकियों ने अपना निशाना बनाया है।सुफियान और उस्मान मलिक को गोली लगने के बाद श्रीनगर स्थित जेवीसी हॉस्पिटल बेमिना में भर्ती कराया गया, जहां दोनों का इलाज चल रहा है। दोनों ही श्रमिक उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से हैं।
सुफिया और उस्मान जल शक्ति विभाग के लिए दिहाड़ी मजदूर के तौर पर यहां काम कर रहे थे, फिलहाल उनकी स्थिति अभी स्थिर है। घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर सुरक्षाकर्मियों की टीम पहुंची और यहां आतंकियों की धरपकड़ के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया।
इससे पहले एक डॉक्टर और छह बाहरी श्रमिकों को आतंकियों ने निशाना बनाया था और उन्हें मौत के घाट उतार दिया था। आतंकियों ने गांदेरबल जिले में सोनमर्ग इलाके में स्थित एक निर्माण स्थल पर गोलीबारी की थी। 18 अक्तूबर को बिहार के एक श्रमिक की आतंकियों ने शोपियां में गोली मारकर हत्या कर दी थी।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के श्रीनगर सांसद आगा रूहुल्लाह मेंहदी ने बढ़ी हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त करेत हुए कहा नागरिकों पर आतंकवादी हमले की खबर से दुखी हूं। मेरी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ हैं।
भाजपा शासन (केंद्र में), जो जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा को सीधे नियंत्रित करता है, वह घाटी में हिंसा के लिए जिम्मेदार है। मैं उनसे पूछना चाहता हूं – हाल ही में हुए चुनावों के तुरंत बाद इन हमलों में अचानक वृद्धि क्यों हुई? 16 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर की पहली निर्वाचित सरकार की स्थापना के बाद से बडगाम में हुआ हमला पांचवीं ऐसी घटना है, जिससे मौजूदा सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला सहित नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने हिंसा की इस ताजा घटना पर दुख जताया है और इसकी निंदा की है।
इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख तारिक हमीद कर्रा ने इस हमले को “सबसे दुर्भाग्यपूर्ण और अत्यधिक निंदनीय” बताया और सरकार से इन “अमानवीय, शर्मनाक और कायरतापूर्ण कृत्यों” को रोकने के लिए और अधिक सख्त कदम उठाने का आग्रह किया।
इन घटनाओं के मद्देनजर, मध्य कश्मीर में, खास तौर पर मागाम इलाके में सुरक्षा तंत्र को काफी मजबूत किया गया है, जिसमें व्यापक घेराबंदी जैसे उपाय शामिल हैं। समुदाय और नेताओं को उम्मीद है कि इन कदमों से हिंसा पर लगाम लगेगी और क्षेत्र में प्रवासी श्रमिकों और निवासियों के लिए सुरक्षा की भावना बहाल होगी।
