नशा करके फ्लाइट नहीं उड़ा पाएंगे, चढ़ने से पहले ही हो जाएगा डोप टेस्‍ट

इस महीने की शुरूआत में फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट अचानक हवा में 300 फीट नीचे आ गई थी. जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि कॉकपिट में बैठा पायलट गांजे के नशे में था.हादसे के वक्‍त विमान में 137 यात्री सवार थे और उनमें से 24 यात्रियों को चोट लगी थी. इस घटना के बाद सरकार अब चौकन्‍ना हो गई है. नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि अब हर पायलट को साल में कम से कम एक बार रैंडम तरीके से टेस्ट करने के विकल्प पर भी विचार हो रहा है. अभी कुल पायलट नेटवर्क के 10 फीसदी पायलटों का डोप ही टेस्ट किया जाता है. सारे पायलटों का नहीं.नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा है कि कॉकपिट में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इसी लिए सरकार हर पायलट का साल में कम से कम एक बार, बिना किसी पूर्व सूचना के डोप टेस्ट अनिवार्य करने पर विचार कर रही है. मौजूदा 10 फीसदी के नियम को बढ़ाकर 100 फीसदी तक ले जाने के विकल्प पर DGCA सभी एयरलाइंस और स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत कर रहा है.

संचालन पर असर परखने के बाद ही होगा नया नियम लागू

100 फीसदी डोप टेस्‍ट लागू करने से पहले सरकार विमान सुरक्षा और उड़ानों के संचालन पर इसके असर को देखेगी. दोनों के बीच सही संतुलन बनाने के लिए रणनीति तैयार की जा रही है. DGCA यह रणनीति तैयार कर रहा है कि अगर हर पायलट का साल में कम से कम एक बार डोप टेस्ट किया जाए तो इसका विमानन संचालन पर क्या असर पड़ेगा.

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