IGRS की समयसीमा भी बेअसर! घघरी-बभनी सड़क पर विभागीय उदासीनता से उठे सवाल, उमंग गुप्ता ने सरकार और प्रशासन को घेरा
IGRS की समयसीमा भी बेअसर! घघरी-बभनी सड़क पर विभागीय उदासीनता से उठे सवाल, उमंग गुप्ता ने सरकार और प्रशासन को घेरा

टी.एल.भास्कर प्रदेश क्राइम ब्यूरो चीफ
सोनभद्र। जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए बनाई गई जनसुनवाई (IGRS) व्यवस्था और शासन के समयबद्ध शिकायत निस्तारण के दावों पर घघरी-बभनी मुख्य संपर्क मार्ग का मामला गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जनहित में लगातार सड़क निर्माण की मांग उठा रहे उमंग गुप्ता ने निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बाद भी प्रभावी कार्रवाई सामने न आने पर लोक निर्माण विभाग, जिला प्रशासन और जनसुनवाई व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर तीखा सवाल उठाया है।
घघरी-बभनी मुख्य संपर्क मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर उमंग गुप्ता ने IGRS शिकायत संख्या 40020026014048 के माध्यम से शासन-प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया था। शिकायत के निस्तारण की निर्धारित समयसीमा 17 अगस्त 2026 थी। लेकिन समयसीमा समाप्त होने के बाद भी सड़क की वास्तविक स्थिति बदलने वाली कोई ठोस कार्रवाई अथवा स्पष्ट स्थलीय जांच रिपोर्ट सामने नहीं आने पर अब जनसुनवाई व्यवस्था की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
सवाल यह है कि जब शासन ने जनसुनवाई के माध्यम से शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण की व्यवस्था बनाई है, तो फिर निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद भी एक महत्वपूर्ण ग्रामीण सड़क की समस्या समाधान की प्रतीक्षा में क्यों है? क्या जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराना ही समाधान मान लिया जाएगा, या संबंधित विभाग वास्तव में मौके पर जाकर जनता की समस्या का समाधान भी करेगा?
उमंग गुप्ता ने आरोप लगाया कि लोक निर्माण विभाग और संबंधित प्रशासनिक तंत्र की उदासीनता का खामियाजा वर्षों से ग्रामीण भुगत रहे हैं। घघरी-बभनी मार्ग से बड़ी संख्या में ग्रामीणों का आवागमन होता है। सड़क की खराब स्थिति के कारण विद्यार्थियों, मरीजों, किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों को परेशानी उठानी पड़ती है। बरसात में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।
उन्होंने कहा कि सरकार यदि जनसुनवाई को जनता की आवाज सुनने का प्रभावी माध्यम मानती है, तो अधिकारियों को भी यह समझना होगा कि IGRS पर दर्ज शिकायत केवल एक ऑनलाइन नंबर नहीं, बल्कि किसी वास्तविक नागरिक की वास्तविक समस्या होती है। निर्धारित समयसीमा के बाद भी यदि समस्या जस की तस रहती है तो यह केवल विभागीय देरी नहीं, बल्कि जवाबदेही की व्यवस्था पर भी सवाल है।
18 अगस्त 2026 को उमंग गुप्ता ने मामले में अनुस्मारक दर्ज कराते हुए फिर सवाल उठाया है कि घघरी-बभनी मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कब होगा, सड़क किस विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है, अब तक क्या कार्रवाई की गई और स्थायी सड़क निर्माण के लिए आगे की कार्ययोजना क्या है?
उमंग गुप्ता ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले को महज औपचारिक निस्तारण या कागजी रिपोर्ट तक सीमित न रखा जाए। लोक निर्माण विभाग के सक्षम अधिकारियों द्वारा मौके पर पहुंचकर मार्ग का निरीक्षण कराया जाए तथा जांच रिपोर्ट, प्रस्तावित निर्माण कार्य और उसकी समयसीमा को सार्वजनिक किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि निर्धारित समयसीमा में शिकायत पर कार्रवाई नहीं करने में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। जनता को यह जानने का अधिकार है कि शिकायत के निस्तारण में देरी क्यों हुई और सड़क निर्माण की दिशा में अब तक क्या प्रगति हुई है।
उमंग गुप्ता ने कहा कि जनहित के मुद्दों को उठाना केवल शिकायत दर्ज कराकर चुप बैठ जाना नहीं है। घघरी-बभनी मार्ग का मुद्दा ग्रामीणों की सुविधा, सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा है और जब तक इसका स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक संबंधित विभाग और प्रशासन से जवाबदेही मांगना जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि जनसुनवाई की सफलता पोर्टल पर दिखाई देने वाले ‘निस्तारण’ से नहीं, बल्कि जनता को जमीन पर मिले समाधान से तय होनी चाहिए। यदि सड़क आज भी बदहाल है तो कागजों में दर्ज कार्रवाई जनता की समस्या का समाधान नहीं मानी जा सकती।
