बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव अब नई चर्चा का विषय बना

बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव अब नई चर्चा का विषय बन गया है। चुनाव आयोग ने इस सीट पर मतदान की तारीखों का ऐलान कर दिया है। जिसके बाद सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं।

सीट खाली होने के बाद यहां मुकाबला दिलचस्प होने के संकेत मिल रहे हैं।

एक तरफ भाजपा अभी अपने उम्मीदवार के नाम पर फैसला नहीं कर पाई है, वहीं दूसरी ओर तेज प्रताप यादव ने सबसे पहले प्रत्याशी उतारकर चुनावी माहौल को गर्म कर दिया है। इस बीच जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के भी चुनाव लड़ने की संभावना लगातार चर्चा में बनी हुई है। ऐसे में बांकीपुर का उपचुनाव केवल एक सीट का मुकाबला नहीं, बल्कि कई बड़े राजनीतिक संदेश देने वाला चुनाव माना जा रहा है।

चुनाव आयोग ने जारी किया कार्यक्रम

चुनाव आयोग ने गुरुवार को निविन नबीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया। इस सीट पर 30 जुलाई को मतदान कराया जाएगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना होगी। आयोग ने चुनाव की सभी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

भाजपा उम्मीदवार का इंतजार

उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है, लेकिन भाजपा ने अब तक अपना उम्मीदवार तय नहीं किया है। दूसरी ओर तेज प्रताप यादव सबसे पहले अपने प्रत्याशी का नाम घोषित कर चुके हैं। जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने की चर्चा भी लगातार बनी हुई है। कुछ समय पहले उन्होंने कहा था कि अगर उनके मैदान में उतरने से भाजपा बांकीपुर जैसी मजबूत सीट हारती है तो वे चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।

भाजपा में कई नाम चर्चा में

भाजपा की ओर से उम्मीदवार घोषित नहीं हुआ है, लेकिन कई नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। इनमें सबसे अधिक चर्चा अजय आलोक और रणवीर नंदन की हो रही है। दोनों को संभावित दावेदार माना जा रहा है।

अजय आलोक राष्ट्रीय मीडिया में भाजपा का प्रमुख चेहरा माने जाते हैं। वे कायस्थ समाज से आते हैं और उनके पिता पद्मश्री गोपाल प्रसाद सिन्हा पटना के प्रसिद्ध डॉक्टर रहे हैं। अजय आलोक ने 2003 में राजनीति की शुरुआत की थी। 2005 में कैमूर की चैनपुर सीट से लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके।

2010 में उन्होंने उसी सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, मगर सफलता नहीं मिली। इसके बाद 2012 में वे जदयू में शामिल हुए और पार्टी के प्रवक्ता व महासचिव बने। वर्ष 2023 में उन्होंने जदयू छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। फिलहाल वे भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं।

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