दिल्ली आते ही मार्को रूबियो के 5 बड़े ऐलान

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो 4 दिन की यात्रा पर भारत आए हैं. पहले दिन कोलकाता में लैंड होने के बाद वो दिल्ली पहुंचे और यहां पर उन्होंने सेवा तीर्थ जाकर पीएम मोदी के साथ लंबी बातचीत थी.

इस दौरान अमेरिका और भारत के रिश्तों पर डीटेल में चर्चा हुई, जिसमें एनर्जी सिक्योरिटी से लेकर ट्रेड यहां तक कि ईरान और चीन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई. इस मीटिंग के बाद एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए उन्होंने 5 बड़े ऐलान किए हैं. पीएम मोदी की तारीफें और भारत के बढ़ते रुतबे का बखान करते हुए उन्होंने चीन-ईरान पर भी दिल खोलकर बातें की हैं.
तेल पर भारत को दिया ऑफर
इंटरव्यू में जब रूबियो से रूस से सस्ते तेल की खरीद पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही साफ शब्दों में भारत का भ्रम दूर कर दिया. मार्को रूबियो ने पहला बड़ा ऐलान करते हुए कहा, ‘रूस से तेल खरीदने का मुद्दा कभी भी विशेष रूप से भारत को लेकर नहीं था. यह यूक्रेन युद्ध के कारण रूस पर आर्थिक दबाव बनाने और उसे नुकसान पहुंचाने की हमारी एक व्यापक वैश्विक कोशिश का हिस्सा था.’

रूबियो ने आगे कहा, ‘यह सच है कि भारत रूसी तेल का एक बहुत बड़ा खरीदार बनकर उभरा, लेकिन हमारी कार्रवाई कभी भी भारत के खिलाफ नहीं थी. बल्कि, इस मुद्दे को सुलझाने के दौरान हमने यह देखा कि भारत के पास अपने ऊर्जा स्रोतों को और डाइवर्सिफाई (विविधता लाने) करने का एक बेहतरीन मौका है. भारत अब अमेरिका और संभावित रूप से वेनेजुएला जैसे अन्य देशों से भी तेल खरीदकर अपनी जरूरतों को पूरा कर सकता है.’

ईरान की ‘गुंडागर्दी’ पर बिफरे
दुनिया भर में आम जनता की जेब पर भारी पड़ रहे पेट्रोल-डीजल और सीएनजी के दामों पर रूबियो ने दूसरा सबसे बड़ा और सनसनीखेज ऐलान किया. उन्होंने सीधे तौर पर ईरान को घेरते हुए कहा, ‘आज दुनिया भर में तेल की कीमतें सिर्फ इसलिए आसमान छू रही हैं, क्योंकि ईरान ने पूरी तरह से गैरकानूनी और आपराधिक तरीके से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपना कंट्रोल जमाने का फैसला कर लिया है.’
रूबियो ने आगे ईरान की पोल खोलते हुए कहा, ‘ईरान अब समुद्र से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को सरेआम धमका रहा है कि अगर उन्होंने ईरान को मनमाना टैक्स (टोल) नहीं दिया या उनकी बात नहीं मानी, तो वे उन जहाजों को समुद्र में डुबो देंगे. यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है और इसकी इजाजत किसी भी कीमत पर नहीं दी जा सकती.’ उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत दोनों ही समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने पर एक जैसी सोच रखते हैं.

पीस डील और परमाणु खतरे पर खुलकर बात
ईरान के साथ चल रही सीक्रेट शांति वार्ता का सस्पेंस खोलते हुए रूबियो ने तीसरा बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा, ‘ईरान के साथ किसी समझौते पर पहुंचना आसान काम नहीं है, क्योंकि वहां का पूरा सिस्टम बिखरा हुआ है और उसे कट्टरपंथी मौलवी चला रहे हैं. फिर भी, हम चाहते हैं कि इसका कोई शांतिपूर्ण समाधान निकले.’
परमाणु खतरे पर बड़ा अपडेट देते हुए रूबियो ने खुलासा किया, ‘ईरान से सबसे बड़ा खतरा उसके परमाणु कार्यक्रम से है और हम प्राथमिकता के तौर पर इसे बातचीत से सुलझाना चाहते हैं. हमारी कोशिशें लगातार जारी हैं और जिस वक्त मैं आपसे बात कर रहा हूं, ठीक इसी समय हमारे लोग ईरान के साथ इस बातचीत की टेबल पर बैठे हुए हैं.’ उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति (स्टेटस को) अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

‘अब भारत में हथियार बनाएंगी अमेरिकी कंपनियां’
भारत की तारीफों के पुल बांधते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने चौथा बड़ा ऐलान डिफेंस सेक्टर को लेकर किया. उन्होंने पीएम मोदी से अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा, ‘आज भारत और अमेरिका के विचार पूरी तरह से एक जैसे हैं. मैंने प्रधानमंत्री से भी बात की है, जो इस मामले को लेकर बेहद गंभीर और कड़क रुख रखते हैं. भारत के पास गजब की क्षमता और बेहद कुशल वर्कफोर्स (कामगार) है.’
रूबियो ने आगे कहा, ‘हमारी अमेरिकी कंपनियां अब भारत में ही हथियारों और डिफेंस इक्विपमेंट्स का प्रोडक्शन करने में बेहद दिलचस्पी ले रही हैं. जैसे-जैसे दुनिया के कई देश अपने डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को मजबूत कर रहे हैं, भारत इस पूरी वैश्विक मुहिम में एक बहुत बड़ा और मुख्य रणनीतिक भागीदार बन सकता है.’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारतीय कंपनियां अमेरिका में भी बड़ा निवेश कर रही हैं.

‘इस साल भारत मिलेंगे चारों देश’
चीन की घेराबंदी के लिए बने ‘क्वॉड’ (Quad) संगठन के भविष्य पर रूबियो ने पांचवां और आखिरी बड़ा ऐलान किया. उन्होंने भारत के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा, ‘पूरी दुनिया इस वक्त भारत की तरफ देख रही है क्योंकि भारत ही क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों की अगली बैठक की मेजबानी करने जा रहा है.’
नेताओं के शिखर सम्मेलन पर रूबियो ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि क्वॉड लीडर्स समिट (Quad Leaders’ Summit) इसी साल आयोजित हो और यह कोई साइड इवेंट न होकर एक स्टैंडअलोन (स्वतंत्र) कार्यक्रम हो. हालांकि, हमारे देश (अमेरिका) समेत कुछ देशों में चुनाव होने हैं, जिससे नेताओं के लिए यात्रा करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, लेकिन हम इसके लिए हर हाल में मौका ढूंढेंगे. यह पूरी दुनिया को एक बहुत बड़ा और मजबूत संदेश देने के लिए बेहद जरूरी है.’

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