कोन ब्लॉक में RTI बना मजाक, IGRS में फर्जी निस्तारण सूत्रों का बड़ा खुलासा: ‘भ्रष्टाचार की जड़ खुद अधिकारी-कर्मचारी!’ करोड़ों के घोटाले की आशंका
कोन ब्लॉक में RTI बना मजाक, IGRS में फर्जी निस्तारण सूत्रों का बड़ा खुलासा: ‘भ्रष्टाचार की जड़ खुद अधिकारी-कर्मचारी!’ करोड़ों के घोटाले की आशंका
स्टेट हेड कार्यालय उत्तर प्रदेश
सोनभद्र
जनपद के कोन ब्लॉक में भ्रष्टाचार के आरोप अब बेहद गंभीर और संगठित रूप लेते नजर आ रहे हैं। जहां एक ओर विकास कार्यों में अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं, वहीं अब सूत्रों के हवाले से एक बड़ा दावा सामने आया है कि इस पूरे खेल की जड़ में ब्लॉक के ही कुछ अधिकारी और कर्मचारी शामिल हो सकते हैं।
सूत्रों का कहना है कि बिना अंदरूनी मिलीभगत के इस स्तर का भ्रष्टाचार संभव नहीं है। योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया में यदि गड़बड़ी हुई है, तो इसमें जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की भूमिका की गहन जांच बेहद जरूरी हो जाती है।
मामले ने उस वक्त और गंभीर रूप ले लिया जब ग्रामीणों ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी। आरोप है कि उन्हें अपूर्ण, भ्रामक और अपठनीय उत्तर दिए गए, जिससे साफ जाहिर होता है कि कहीं न कहीं सच्चाई को छिपाने की कोशिश की जा रही है। कई आवेदकों का कहना है कि महत्वपूर्ण दस्तावेज या तो उपलब्ध नहीं कराए गए या ऐसे रूप में दिए गए जिन्हें समझ पाना मुश्किल है।
वहीं, शिकायत निवारण प्रणाली IGRS पर भी सवालों की बौछार हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी शिकायतों पर बिना किसी वास्तविक जांच के ही मनगढ़ंत जवाब अपलोड कर फर्जी निस्तारण कर दिया जाता है। शिकायतकर्ता से संपर्क किए बिना ही फाइल बंद कर देना पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों के अनुसार, कोन ब्लॉक में सड़क, नाली, आवास योजना, शौचालय निर्माण, मनरेगा सहित कई योजनाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। कागजों में कार्य पूर्ण दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। कई जगह कार्य अधूरे हैं, तो कई जगह गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है, तो RTI में सही जानकारी क्यों नहीं दी जा रही? IGRS में फर्जी निस्तारण क्यों किया जा रहा है? और सबसे बड़ा सवाल—क्या वास्तव में इस पूरे भ्रष्टाचार के पीछे ब्लॉक के अंदर बैठे जिम्मेदार लोग ही हैं?
क्षेत्रवासियों ने एकजुट होकर शासन-प्रशासन से मांग की है कि:
कोन ब्लॉक की तत्काल विशेष ऑडिट कराई जाए
पूरे मामले की जांच के लिए सीबीसीआईडी और विजिलेंस टीम गठित की जाए
अब तक ब्लॉक में कार्यरत रहे सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राम प्रधानों की भूमिका की गहन जांच हो
सभी संबंधित लोगों के आय-व्यय, चल-अचल संपत्तियों की जांच की जाए
उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज संपत्तियों को भी जांच के दायरे में लाया जाए
ग्रामीणों का दावा है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई गई, तो करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हो सकता है, जिसमें कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्रवासियों ने माननीय मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो भ्रष्टाचार की यह जड़ और गहरी होती जाएगी और आम जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
अब यह देखना बेहद अहम होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप को किस स्तर पर लेता है—क्या वाकई “जड़” तक पहुंचकर कार्रवाई होगी या मामला फिर कागजों में ही दबा दिया जाएगा।
