महाकुम्भ में 14 फ्लाईओवर, नौ अंडरपास, 12 कॉरिडोर बनाए गए

महाकुम्भ नगर मुख्य संवाददाता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को डिजिटल मीडिया सेंटर में मीडियाकर्मियों के साथ संवाद किया और महाकुम्भ को वैश्विक बनाने में मीडिया की भूमिका की सराहना की।उन्होंने कहा कि महाकुम्भ के पूरे आयोजन में सभी निर्माण कार्यों के लिए डबल इंजन की सरकार ने मिलकर लगभग 7.30 हजार करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें 200 से अधिक सड़कों का निर्माण, 14 फ्लाईओवर, नौ अंडरपास, 12 कॉरिडोर बनाए गए।
प्रयागराज में अक्षयवट कॉरिडोर, सरस्वती कूप, पातालपुरी, बड़े हनुमान, महर्षि भरद्वाज, नागवासुकि, शृंग्वेरपुर, द्वादश माधव कॉरिडोर समेत 12 कॉरिडोर विकसित हुए हैं जो पर्यटन की दृष्टि से हर एक श्रद्धालु को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। श्रद्धालुजनों की सुविधा के लिए महाकुम्भ की पूरी व्यवस्था से हमने लगभग एक लाख कार्मिकों को जोड़ा, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम को सफलता की नई ऊंचाई तक पहुंचाया।
सीएम योगी ने कहा कि 13 जनवरी पौष पूर्णिमा से 26 फरवरी महाशिवरात्रि तक चले इस महायज्ञ के दौरान प्रयागराज एक स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हुआ है। आज जो भी प्रयागराज आ रहा है वह इसे देखकर अभिभूत हो रहा है। यहां की सुविधाओं, यहां के मॉडल को देखकर लोग सेल्फी ले रहे हैं।
आस्था और आर्थिकी का विजन साकार हुआ
संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि आस्था और आर्थिकी का जो विजन प्रधानमंत्री ने दिया है वह यहां साकार होता दिखाई दिया। उत्तर प्रदेश में आध्यात्मिक पर्यटन की भी क्षमता है और यह प्रदेश ने साबित किया। पिछले साल ही उत्तर प्रदेश में 65 करोड़ श्रद्धालु और पर्यटक विभिन्न तीर्थस्थलों पर आए थे। अकेले प्रयागराज में 45 दिन में 66 करोड़ 30 लाख पर्यटक और श्रद्धालु आ चुके हैं, यानी नए-नए रिकॉर्ड बनते दिखाई दे रहे हैं।
आध्यात्मिक पर्यटन के पांच स्थल बने
प्रयागराज महाकुम्भ ने उत्तर प्रदेश के अंदर पांच आध्यात्मिक पर्यटन के स्थल उपलब्ध करा दिए हैं। प्रयागराज से मिर्जापुर और काशी का एक, प्रयागराज से अयोध्या और गोरखपुर का दो, प्रयागराज से लालापुर, राजापुर, चित्रकूट का तीन, प्रयागराज से लखनऊ और नैमिषारण्य का चार और प्रयागराज से बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे व आगरा होते हुए मथुरा-वृंदावन का पांच। इन 45 दिनों में 100 देशों का प्रतिनिधित्व प्रयागराज में हुआ है, जिसमें 74 देशों के एंबेसडर और हाई कमिश्नर यहां आए थे, 12 देश के मंत्री या राष्ट्राध्यक्ष की उपस्थिति भी रही थी।
हर विभाग ने मिलकर आयोजन को बनाया सफल
सीएम ने कहा कि पूरे मेले को फेस रिकॉग्निशन से जोड़ते हुए लगभग 3000 सीसीटीवी कैमरे को एआई टूल से जोड़ा गया। इसके माध्यम से एक-एक व्यक्ति के आने की सूचना और उसके चेहरे की पहचान के साथ-साथ कितने लोगों ने डुबकी लगाई, उन सबकी गिनती हो सकी। इसके माध्यम से लखनऊ में रहते हुए भी मैं यहां की गतिविधियों को 360 डिग्री तक देख पा रहा था। यहां 15000 से ऊपर स्वच्छताकर्मी तैनात थे। इसके अलावा 7000 से अधिक परिवहन निगम की बसें और 750 से अधिक शटल बसें थीं। रेलवे ने लगभग 13000 मेला स्पेशल चलाकर यात्रियों को सकुशल गंतव्य तक पहुंचाया। साढ़े तीन करोड़ यात्री केवल उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों से प्रयागराज आए।
7.5 हजार करोड़ खर्च से 3.5 लाख करोड़ की ग्रोथ
उन्होंने कहा कि आस्था और आर्थिकी के बीच समन्वय हो सकता है यह मीडिया ने साबित करके दिखाया। 7.5 हजार करोड़ खर्च करके 3.5 लाख करोड़ की वृद्धि दर्ज की जा सकती है, यह भी मीडिया ने बताया। मेरे पास लगातार राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों से पत्र आ रहे हैं कि भीड़ प्रबंधन कैसे होता है, आस्था और आर्थिकी का समन्वय कैसे हो सकता है इस पर एक घंटे का टॉक शो कीजिए।
महाकुम्भ का समापन नहीं, 2031 की तैयारी शुरू
मीडिया से संवाद में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि महाकुम्भ 2025 का समापन नहीं हुआ है बल्कि 2031 के कुम्भ की तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। यह महाकुम्भ प्रयागराज के विकास की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण रहा है। बड़े-बड़े शोधकर्ता सोच रहे हैं कि इतने श्रद्धालुओं की व्यवस्था कैसे हुई। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मीडिया की सराहना की।
