वर्तमान भारतीय शिक्षा की स्थिति एवं उसमें सुधार की आवश्यकता भारत सरकार आजादी के उपरांत शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी विकास किया
वर्तमान भारतीय शिक्षा की स्थिति एवं उसमें सुधार की आवश्यकता भारत सरकार आजादी के उपरांत शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी विकास किया है।

आज भारत के लगभग हर पंचायत में विद्यालय हो गए हैं, हर नगर पंचायत में महाविद्यालय खुल गए हैं, लगभग हर जिले में एक डिप्लोमा कॉलेज एवं एक या दो आईटीआई कॉलेज खुल गए हैं, हर कमिश्नरी में एक विश्वविद्यालय खुल गया है जो की शिक्षा क्षेत्र में विकास को दर्शाता है इन विद्यालयों के अलावा सरकार प्राइवेट विद्यालयों को मान्यता दी है जो कि लगभग देश के अंदर सभी जगह अपनी विद्यालय खोले हुए हैं कभी-कभी इन प्राइवेट विद्यालयों के चलते सरकारी विद्यालयों में बच्चे की संख्या कम हो जाती हैं,जबकि प्राइवेट विद्यालय में ट्यूशन फीस भी देनी पड़ती है लेकिन सरकारी विद्यालय में पढ़ाई एकदम मुफ्त होती हैं जो कि सो चने की बात है । इससे प्रमाणित होता है कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षक वेतन अधिक लेकर भी प्राइवेट विद्यालयों के शिक्षक से तुलनात्मक रूप से शिक्षा कम दे पाते हैं, जिसके कारण अभिभावक प्राइवेट विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए भेज देते हैं इस स्थिति को देखते हुए सरकार को सभी प्राइवेट विद्यालयों को सरकारी विद्यालयों में सम्मिलित कर लेनी चाहिए तथा हर विद्यालय के शिक्षक से अपने विद्यालय से 90% से सौ प्रतिशत तक परिणाम के लिए बोलना चाहिए बीच-बीच में बी एस ए तथा प्रखंड विकास अधिकारी को इस विद्यालय में दौरा करनी चाहिए जिससे कि बच्चों की पढ़ाई की स्थिति का जांच हो सके एवं शिक्षक उपस्थित हैं या बच्चे को किस तरह से पढ़ना है उसकी आकलन हो सके सारे विद्यालयों को सरकारी करण कर देश के बड़े से छोटे लोगों के बच्चों को एक ही तरह के विद्यालय में पढ़ाया जाना चाहिए। अपने देश के सारे सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था सुधर जाने पर सारे देश की जनता भी महसूस करेगी कि यहां दोहरी शिक्षा प्रणाली नहीं चल रही है इसके लिए केंद्रीय कमेटी बने एवं देश स्तर पर विद्यालयों की सुधार करके जनता अनावश्यक शिक्षा संबंधी खर्चे से भी बच जाएगी तथा शिक्षा देश या विश्व स्तर का मिलने से देश अच्छे तरह से विकास करने लगेगा। डॉक्टर एम ठाकुर
