तमिलनाडु: मुख्यमंत्री विजय का शपथ ग्रहण; केंद्र के नए नियमों के तहत हुआ ‘वंदे मातरम’ का पूर्ण गायन

अभिनेता से राजनेता बने ‘थलपति’ विजय ने रविवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया. हालांकि, इस समारोह में केवल सत्ता परिवर्तन ही चर्चा का विषय नहीं रहा, बल्कि कार्यक्रम के दौरान अपनाए गए नए प्रोटोकॉल ने सबका ध्यान खींचा.

मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह में केंद्र सरकार के संशोधित दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए राष्ट्रगान और राज्य गीत से पहले ‘वंदे मातरम’ का पूर्ण गायन किया गया.

केंद्र के नए दिशा-निर्देशों का पालन

हाल ही में केंद्र सरकार ने नए दिशानिर्देश जारी किए थे, जिसमें सरकारी कार्यक्रमों के दौरान ‘वंदे मातरम’ के सभी छह छंदों का पूर्ण गायन अनिवार्य किया गया है. विजय के शपथ ग्रहण समारोह में इसी निर्देश को लागू किया गया. केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप, राष्ट्रगान शुरू होने से पहले वंदे मातरम का पूरा गायन किया गया, जो राज्य में लंबे समय से चली आ रही परंपराओं में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है.

परंपरा में दिखा बड़ा बदलाव

आमतौर पर तमिलनाडु के सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत राज्य गीत ‘तमिल थाई वझ्थु’ (Tamil Thai Vazhthu) के साथ होती है. लेकिन इस बार क्रम में बदलाव देखा गया. समारोह की शुरुआत वंदे मातरम से हुई, जिसके बाद राष्ट्रगान बजाया गया और अंत में राज्य गीत ‘तमिल थाई वझ्थु’ का गायन हुआ. इस नए अनुक्रम ने राज्य की स्थापित परंपराओं से हटकर एक नई शुरुआत की है.

जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में हुआ भव्य आयोजन

चंद्रशेखर जोसेफ विजय (विजय) ने रविवार को चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में आयोजित एक भव्य समारोह में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने 51 वर्षीय नेता को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. उनकी पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) ने हालिया चुनाव के बाद सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत हासिल किया था.

राजनीतिक मायने और भविष्य की राह

विजय का मुख्यमंत्री बनना तमिलनाडु की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है. एक लोकप्रिय अभिनेता के तौर पर दशकों तक लोगों के दिलों पर राज करने के बाद, अब उनके कंधों पर राज्य के नेतृत्व की जिम्मेदारी है. जानकारों का मानना है कि शपथ ग्रहण में केंद्रीय प्रोटोकॉल का पालन करना केंद्र और राज्य के बीच एक समन्वयकारी रुख का संकेत हो सकता है. विधानसभा में बहुमत साबित करने के बाद अब सभी की निगाहें विजय के शुरुआती प्रशासनिक फैसलों पर टिकी हैं.

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