वर्षों से बंद पड़ा गड़िया उपकेंद्र, ग्रामीणों में नाराजगी
वर्षों से बंद पड़ा गड़िया उपकेंद्र, ग्रामीणों में नाराजगी

अहमद रजा
नियमित कर्मचारी तैनाती की मांग तेज
म्योरपुर/सोनभद्र। क्षेत्र के गड़िया गांव में बना स्वास्थ्य उपकेंद्र वर्षों से केवल शोपीस बनकर रह गया है। भवन पूरी तरह तैयार होने के बावजूद आज तक वहां नियमित रूप से कोई स्वास्थ्य कर्मचारी नहीं बैठता, जिससे ग्रामीणों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि उपकेंद्र के बंद रहने के कारण छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी दूर अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को उठानी पड़ रही है। कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत और मांग किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
राम अवध यादव, देव किशुन सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग करते हुए कहा कि गड़िया में बने उपकेंद्र को प्रतिदिन खोला जाए तथा वहां नियमित रूप से स्वास्थ्य कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा करती है, लेकिन गड़िया का उपकेंद्र वर्षों से बंद रहने से लोग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब पड़री गांव में नया उपकेंद्र खोलने की मांग की जाती है, तब अधिकारियों द्वारा यह कहकर मामला टाल दिया जाता है कि पांच किलोमीटर दूर स्थित गड़िया उपकेंद्र सुचारु रूप से संचालित है और वहां स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि गड़िया उपकेंद्र पर कर्मचारी नियमित रूप से आते ही नहीं हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और सुचारु रूप से संचालित किए जाने का दावा किया जाता है, वहीं दूसरी ओर गड़िया उपकेंद्र की स्थिति विभागीय दावों की पोल खोल रही है। इससे क्षेत्रीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उपकेंद्र का नियमित संचालन शुरू नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। गांव के लोगों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर स्वास्थ्य सेवाएं बहाल कराने की मांग की है।
