अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी हमले के बाद एक ईरानी युद्धपोत के डूबने की घटना ने पहले से जारी तनावपूर्ण हालात को और गंभीर बना दिया

अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी हमले के बाद एक ईरानी युद्धपोत के डूबने की घटना ने पहले से जारी तनावपूर्ण हालात को और गंभीर बना दिया है। इस कार्रवाई को लेकर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे खुला आक्रामक कदम बताया है।

ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस हमले के गंभीर परिणाम होंगे। खास बात यह है कि जिस पोत को निशाना बनाया गया, वह हाल ही में भारत द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में भाग लेकर लौटा था और उसे “भारतीय नौसेना का अतिथि” भी बताया गया।

बिना किसी पूर्व चेतावनी के किया गया हमला

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि लगभग 130 से अधिक नाविकों को लेकर चल रहे फ्रिगेट ‘आईरिस देना’ पर बिना किसी पूर्व चेतावनी के हमला किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है और अमेरिका को इसके लिए भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार जहाज पर करीब 180 लोग सवार थे, जिनमें से 30 से अधिक को बचा लिया गया है, जबकि बाकी की तलाश जारी है।

अमेरिका की ओर से इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की गई है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने वॉशिंगटन में बयान देते हुए कहा कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से निशाना बनाया और उसे डुबो दिया। उन्होंने इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी दुश्मन युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबोने की पहली घटना बताया। उनके अनुसार, जिस पोत को निशाना बनाया गया, उसका नाम ईरान के पूर्व जनरल कासिम सुलेमानी के नाम पर रखा गया था, जिन्हें अमेरिका ने पूर्व में एक सैन्य कार्रवाई में मार गिराया था।

‘आईरिस देना’ मौदगे श्रेणी का आधुनिक फ्रिगेट था

‘आईरिस देना’ ईरान की मौदगे श्रेणी का एक आधुनिक फ्रिगेट था, जिसे समुद्री गश्त और सामरिक अभियानों के लिए तैनात किया जाता था। यह पोत भारी तोपों, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, एंटी-शिप मिसाइलों और टॉरपीडो से लैस था। साथ ही इसमें एक हेलीकॉप्टर तैनात करने की सुविधा भी थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने दावा किया कि मौजूदा संघर्ष के दौरान अब तक कम से कम 17 ईरानी नौसैनिक पोतों को निष्क्रिय या डुबोया जा चुका है।

इस बीच, श्रीलंका ने मानवीय आधार पर बचाव अभियान चलाया। श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिथा हेराथ ने संसद में बताया कि गॉल तट से लगभग 40 समुद्री मील दूर तड़के जहाज के डूबने की सूचना मिली। इसके बाद श्रीलंकाई नौसेना और वायुसेना ने संयुक्त अभियान चलाकर कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। फिलहाल हादसे के सटीक कारणों की जांच जारी है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में पहले से ही तनाव चरम पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इस तरह की सैन्य कार्रवाई से व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में वैश्विक कूटनीति की दिशा और प्रमुख शक्तियों की प्रतिक्रिया इस संकट की गंभीरता तय करेगी।

Above Reporter Photo
[embedyt] https://www.youtube.com/embed?listType=playlist&list=UCYzEYpxh613jPw3luW3xiQA&layout=gallery[/embedyt]