कोटा ग्राम पंचायत में एस.सी./एस.टी. आरक्षण न मिलने से ग्रामीणों में आक्रोश, जिम्मेदारों से पुनर्विचार की मांग
कोटा ग्राम पंचायत में एस.सी./एस.टी. आरक्षण न मिलने से ग्रामीणों में आक्रोश, जिम्मेदारों से पुनर्विचार की मांग

संवाददाता राजू यादव
शक्तिनगर /सोनभद्र।
कोटा ग्राम पंचायत में एस.सी./एस.टी. आरक्षण न मिलने से ग्रामीणों में आक्रोश, जिम्मेदारों से पुनर्विचार की मांग
सोनभद्र। जनपद सोनभद्र के ग्राम पंचायत कोटा में पंचायत चुनाव को लेकर इस बार माहौल गर्म है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब से कोटा को अलग ग्राम पंचायत घोषित किया गया है, तब से अब तक एक भी बार एस.सी. या एस.टी. वर्ग के लिए प्रधान पद आरक्षित नहीं किया गया। लगातार चार बार सामान्य (जनरल) और एक बार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए सीट आरक्षित होने से अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदाय के लोगों में निराशा और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि कोटा ग्राम पंचायत में एस.सी. और एस.टी. समुदाय की उल्लेखनीय आबादी है। इसके बावजूद अब तक उन्हें प्रधान पद पर प्रतिनिधित्व का अवसर नहीं मिल सका। जबकि जनपद सोनभद्र को प्रदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में गिना जाता है। ऐसे में किसी एक ग्राम पंचायत में लगातार सामान्य सीट आना ग्रामीणों के अनुसार निष्पक्ष आरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का तर्क है कि पंचायत चुनाव में आरक्षण का उद्देश्य सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करना और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है। यदि किसी पंचायत में वर्षों तक एक ही वर्ग को अवसर मिलता रहे और अन्य वर्ग वंचित रह जाएं, तो इससे लोकतांत्रिक भावना प्रभावित होती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि आगामी पंचायत चुनाव में कोटा ग्राम पंचायत की आरक्षण स्थिति की निष्पक्ष समीक्षा की जाए।
ग्रामवासियों का कहना है कि यदि इस बार एस.सी. या एस.टी. वर्ग के लिए सीट आरक्षित की जाती है, तो उस वर्ग के योग्य और शिक्षित प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में उतर सकेंगे। इससे पंचायत में विविध सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा और विकास योजनाओं का लाभ समाज के सभी वर्गों तक संतुलित रूप से पहुंच सकेगा।
ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से पारदर्शी तरीके से आरक्षण सूची जारी करने और जनसंख्या अनुपात के आधार पर पुनर्विचार करने की मांग की है। पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच कोटा ग्राम पंचायत की आरक्षण स्थिति अब चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है।
अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की मांग पर क्या निर्णय लेता है और क्या इस बार कोटा ग्राम पंचायत में सामाजिक संतुलन की दिशा में कोई नई पहल देखने को मिलती है। जनपद सोनभद्र के ग्राम पंचायत कोटा में पंचायत चुनाव को लेकर इस बार माहौल गर्म है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब से कोटा को अलग ग्राम पंचायत घोषित किया गया है, तब से अब तक एक भी बार एस.सी. या एस.टी. वर्ग के लिए प्रधान पद आरक्षित नहीं किया गया। लगातार चार बार सामान्य (जनरल) और एक बार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए सीट आरक्षित होने से अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदाय के लोगों में निराशा और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि कोटा ग्राम पंचायत में एस.सी. और एस.टी. समुदाय की उल्लेखनीय आबादी है। इसके बावजूद अब तक उन्हें प्रधान पद पर प्रतिनिधित्व का अवसर नहीं मिल सका। जबकि जनपद सोनभद्र को प्रदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में गिना जाता है। ऐसे में किसी एक ग्राम पंचायत में लगातार सामान्य सीट आना ग्रामीणों के अनुसार निष्पक्ष आरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का तर्क है कि पंचायत चुनाव में आरक्षण का उद्देश्य सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करना और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है। यदि किसी पंचायत में वर्षों तक एक ही वर्ग को अवसर मिलता रहे और अन्य वर्ग वंचित रह जाएं, तो इससे लोकतांत्रिक भावना प्रभावित होती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि आगामी पंचायत चुनाव में कोटा ग्राम पंचायत की आरक्षण स्थिति की निष्पक्ष समीक्षा की जाए।
ग्रामवासियों का कहना है कि यदि इस बार एस.सी. या एस.टी. वर्ग के लिए सीट आरक्षित की जाती है, तो उस वर्ग के योग्य और शिक्षित प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में उतर सकेंगे। इससे पंचायत में विविध सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा और विकास योजनाओं का लाभ समाज के सभी वर्गों तक संतुलित रूप से पहुंच सकेगा।
ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से पारदर्शी तरीके से आरक्षण सूची जारी करने और जनसंख्या अनुपात के आधार पर पुनर्विचार करने की मांग की है। पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच कोटा ग्राम पंचायत की आरक्षण स्थिति अब चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है।
अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की मांग पर क्या निर्णय लेता है और क्या इस बार कोटा ग्राम पंचायत में सामाजिक संतुलन की दिशा में कोई नई पहल देखने को मिलती है।
