कोल इंडिया की गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन पर आयोजित कार्यक्रमों की शृंखला में एनसीएल, अपने विभिन्न स्कूलों में “प्रज्ञान – संस्कारों की प्रेरणा” कार्यक्रम का आयोजन कर रही है।

कोल इंडिया की गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन पर आयोजित कार्यक्रमों की शृंखला में एनसीएल, अपने विभिन्न स्कूलों में “प्रज्ञान – संस्कारों की प्रेरणा” कार्यक्रम का आयोजन कर रही है।

श्री पाणि पंकज पांडेय (प्रबंधक, मानव संसाधन, एनसीएल) वक्ता के रूप में बच्चों को प्रेरणा दे रहे हैं। इसी कड़ी में बुधवार को उन्होंने डीएवी खड़िया के बच्चों को वाह्य स्वच्छता के साथ शुचिता और चरित्र निर्माण के मंत्र दिए। अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षा को ज्ञान, कौशल और चरित्र का समावेश बताते हुए मनुष्यता के संवर्धन पर बल दिया।

भारत सरकार के “स्वच्छता ही सेवा” पहल के आलोक में प्रज्ञान कार्यक्रम के तहत स्वच्छता हेतु डीएवी खड़िया के बच्चों को अभिप्रेरित भी किया गया ।

छात्रों को मिले नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों के संदेश
खड़िया, 24 सितंबर 2025 – डीएवी पब्लिक स्कूल, खड़िया में आज “नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों का विकास – वर्तमान समय की आवश्यकता” विषय पर प्रज्ञान संस्कारों की प्रेरणा कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में आध्यात्मिक चेतना और संस्कारों का अद्भुत समावेश देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्राचार्या एवं क्षेत्रीय अधिकारी (A.R.O.) श्रीमती संध्या एल. पांडेय, प्रेरक वक्ता एवं बाल रामायण के रचयिता श्री पाणि पंकज पांडेय (मैनेजर, एचआर – सिंगरौली), श्री विवेक चतुर्वेदी (स्टाफ अधिकारी – कार्मिक),अमरेंद्र कुमार (मैनेजर, खड़िया परियोजना), तथा पीजीटी श्री संजय पांडेय द्वारा सामूहिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

प्राचार्या श्रीमती संध्या एल. पांडेय ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि – “वर्तमान समय में केवल पुस्तकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है। छात्रों में नैतिक व आध्यात्मिक मूल्यों का समावेश उन्हें एक सच्चा नागरिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।”
कार्यक्रम में प्रस्तुत की गई तलारी ऋषिका की भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुति एवं विनय कुमार के ऊर्जावान सोलो डांस ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया और भरपूर सराहना प्राप्त की।
मुख्य वक्ता श्री पाणि पंकज पांडेय, जो कि राष्ट्रीय अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हैं, ने विद्यार्थियों कोश्री संबोधित करते हुए कहा –
“शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्ति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह चरित्र निर्माण, सामाजिक जिम्मेदारी और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने का माध्यम बनना चाहिए।”
उनकी प्रेरणादायक बातें छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए ही मार्गदर्शक सिद्ध हुईं।
कार्यक्रम के अंत में प्राचार्या महोदया ने सभी अतिथियों को श्रीफल, नारियल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया और कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी को धन्यवाद दिया।
यह आयोजन विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन और जीवन मूल्यों के प्रति जागरूकता लाने में एक प्रेरणास्रोत साबित हुआ। विद्यालय परिवार द्वारा किया गया यह प्रयास न केवल सराहनीय रहा, बल्कि छात्रों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी सिद्ध हुआ।

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