पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और वामपंथी नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य का अपने आवास पर 80 साल की उम्र में अंतिम सांस ली

पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और वामपंथी नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य का गुरुवार की सुबह अपने आवास पर 80 साल की उम्र में अंतिम सांस ली. वह काफी लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और सांस की बिमारी से पीड़ित चल रहे थे.
लंबे समय से खराब स्वास्थ्य की वजह से उन्हें बार-बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ रहा था. पिछले साल निमोनिया की वजह से उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखना पड़ा था. हालांकि उन्होंने बिमारी को मात दे दी थी. बता दें कि सीपीएम नेता 11 साल तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. साल 2011 में ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में उनको हरा कर बंगाल में 37 साल के कम्युनिस्ट सरकार के शासन का अंत किया.
बंगाल में ममता सरकार आने के बाद वह 2015 तक सीपीआई (एम) के पोलित ब्यूरो के सदस्य रहे, लेकिन उसके बाद उन्होंने इसकी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. बीमार होने की वजह से सार्वजनिक जीवन से दूर रहने लगे थे. लंबे समय से बिमार रहने की वजह से उनका घर पर ही इलाज चल रहा था.
भट्टाचार्य कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज के पूर्व छात्र रह चुके हैं. राजनीति में आने से पहले वह एक स्कूल टीचर के रूप में काम करते थे. सीपीआईएम पार्टी में विधायक और राज्यमंत्री के रूप में काम करने के बाद 2000 पहले उपमुख्यमंत्री फिर ज्योति बसु के पद छोड़ने के बाद मुख्यमंत्री बनाया गया. वह 2001 और 2006 में सीपीएम को बंगाल के विधानसभा चुनाव में जीत दिला चुका हैं, लेकिन 2011 के चुनाव में ममता बनर्जी ने सीपीएम के 37 साल के शासन को खत्म कर दिया था.
भट्टाचार्य ने अपने कार्यकाल के दौरान, सीपीएम की ज्योति बसु सरकार की तुलना में व्यापार के प्रति अपेक्षाकृत खुली नीति अपनाई. विडंबना यह है कि उनकी औद्योगीकरण की नीति के वजह से 2011 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. वह काफी लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और सांस की बिमारी से पीड़ित चल रहे थे.लंबे समय से खराब स्वास्थ्य की वजह से उन्हें बार-बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ रहा था. पिछले साल निमोनिया की वजह से उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखना पड़ा था. हालांकि उन्होंने बिमारी को मात दे दी थी. बता दें कि सीपीएम नेता 11 साल तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. साल 2011 में ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में उनको हरा कर बंगाल में 37 साल के कम्युनिस्ट सरकार के शासन का अंत किया.
बंगाल में ममता सरकार आने के बाद वह 2015 तक सीपीआई (एम) के पोलित ब्यूरो के सदस्य रहे, लेकिन उसके बाद उन्होंने इसकी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. बीमार होने की वजह से सार्वजनिक जीवन से दूर रहने लगे थे. लंबे समय से बिमार रहने की वजह से उनका घर पर ही इलाज चल रहा था.
भट्टाचार्य कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज के पूर्व छात्र रह चुके हैं. राजनीति में आने से पहले वह एक स्कूल टीचर के रूप में काम करते थे. सीपीआईएम पार्टी में विधायक और राज्यमंत्री के रूप में काम करने के बाद 2000 पहले उपमुख्यमंत्री फिर ज्योति बसु के पद छोड़ने के बाद मुख्यमंत्री बनाया गया. वह 2001 और 2006 में सीपीएम को बंगाल के विधानसभा चुनाव में जीत दिला चुका हैं, लेकिन 2011 के चुनाव में ममता बनर्जी ने सीपीएम के 37 साल के शासन को खत्म कर दिया था.
भट्टाचार्य ने अपने कार्यकाल के दौरान, सीपीएम की ज्योति बसु सरकार की तुलना में व्यापार के प्रति अपेक्षाकृत खुली नीति अपनाई. विडंबना यह है कि उनकी औद्योगीकरण की नीति के वजह से 2011 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था.
