समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पीएम नरेंद्र मोदी के नारा ‘सबका साथ सबका विकास’ को लेकर भाजपा पर साधा निशान

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारा ‘सबका साथ सबका विकास’ को लेकर भाजपा पर कटाक्ष किया है। अपने ट्वीट में अखिलेश ने लिखा, ‘दिन-पर-दिन कमज़ोर होती भाजपा में टकराव और भटकाव का दौर शुरू हो गया है।भाजपा खेमों में बंट गयी है। भाजपा के एक नेता महोदय अपने ही शीर्ष नेतृत्व के दिए नारे को नकार रहे हैं। कोई मुख्यमंत्री जी कह रहे हैं कि बैकफ़ुट पर जाने की ज़रूरत नहीं है, जो उछल-कूद कर रहे हैं वो बैठा।’

‘सबका साथ, सबका विकास’ की जरूरत नहीं : शुभेंदु अधिकारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने हालिया लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए अल्पसंख्यक समुदाय से कम समर्थन मिलने को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि ”सबका साथ, सबका विकास” की जरूरत नहीं है और इसके बजाय उन्होंने ”हम उनके साथ जो हमारे साथ” का प्रस्ताव दिया। भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी के विस्तारित सत्र को संबोधित करते हुए अधिकारी ने यह भी कहा कि पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा की जरूरत नहीं है।

हालांकि, बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियों को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया और कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ का पूरा समर्थन करते हैं। अधिकारी ने भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी के विस्तारित सत्र को संबोधित करते हुए कहा, ”मैंने राष्ट्रवादी मुस्लिमों की भी बात की है। हम सभी ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात किया करते हैं, लेकिन आगे से अब मैं यह नहीं कहूंगा, क्योंकि मेरा मानना है कि इसके बजाय यह ‘हम उनके साथ जो हमारे साथ’ होना चाहिए…अल्पसंख्यक मोर्चा की कोई जरूरत नहीं है।”

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में करीब 30 फीसदी अल्पसंख्यक मतदाता हैं, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस को हालिया लोकसभा चुनाव में दक्षिणी पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में शानदार जीत हासिल करने में मदद की। वहीं, उत्तर बंगाल में वाम-कांग्रेस गठबंधन और तृणमूल के बीच मतों के विभाजन ने भाजपा को क्षेत्र में कई सीट हासिल करने में मदद की। साल 2014 में भाजपा ने ”सबका साथ, सबका विकास” का नारा दिया था और 2019 में एक कदम आगे बढ़ते हुए इसे ”सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” कर दिया था। अधिकारी ने दावा किया कि लोकसभा चुनाव के दौरान ”कई इलाकों में तृणमूल कांग्रेस के जिहादी गुंडों ने हिंदुओं को वोट नहीं डालने दिया।

अधिकारी ने कहा, ”पश्चिम बंगाल में, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है। तृणमूल के जिहादी गुंडे ऐसा नहीं होने देंगे। स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव राज्य में अशांत क्षेत्र अधिनियम लागू कर ही संभव है। हम राष्ट्रपति शासन लागू कर पिछले दरवाजे से राज्य में सत्ता हथियाना नहीं चाहते।” उन्होंने कहा, ”लोगों के जनादेश से चुनाव जीतने पर ही हम सत्ता में आएंगे। लेकिन उसके लिए, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना होगा।” बाद में, अपनी टिप्पणियों से विवाद उत्पन्न हो जाने पर अधिकारी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि वह बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक आधार पर लोगों के बीच विभाजन करने में यकीन नहीं करते।

उन्होंने कहा, ”मेरे बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया जा रहा है। मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि जो लोग राष्ट्रवादी हैं, वे इस देश और पश्चिम बंगाल के लिए खड़े हैं, हमें उनके साथ होना चाहिए। जो लोग हमारे साथ नहीं खड़े हैं, जो देश और पश्चिम बंगाल के हित के खिलाफ काम करते हैं, हमें उन्हें बेनकाब करने की जरूरत है।” अधिकारी ने कहा, ”साथ ही, ममता बनर्जी की तरह हमें लोगों को बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक में नहीं बांटना चाहिए तथा उन्हें भारतीय के रूप में देखना चाहिए। मैं प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ मंत्र का पूरी तरह से समर्थन करता हूं।”

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