अनुमति से 3 गुना ज्यादा भीड़ सत्संग में जुटी

हाथरस में मंगलवार (3 जुलाई) को सत्संग में हुई भगदड़ के कारण अब तक 121 लोगों की मौत की खबर सामने आ चुकी है.

इसके अलावा 35 लोगों के इस हादस में घायल होने की खबर है, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है.वहीं 20 से 25 लोग इस हादसे के बाद लापता है, जिनकी तलाश जारी है. इस मामले में पुलिस तेजी से कारवाई कर रही है. वहीं इस हादसे के पीछे की वजह का कारण पता लगाने में पुलिस लगातार जुटी हुई है. उन सभी कारणों पर गौर किया जा रहा हैं जिनकी वजह से पंडाल में भगदड़ की स्थिति पैदा हुई. अब तक इस हादसे के पीछे की कई वजह सामने आ चुकी है, जिसमें की सबसे बड़ी वजह सामने आ रही है कि सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही बरतना वहीं इतने बड़े आयोजन की परमिशन लेने की प्रक्रिया में लापरवाही बरतना.

आपको बता दें कि मंगलवार को हुए हादसे को लेकर पहली एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. अभी तक इस मामले में पुलिस ने सत्संग में मुख्य सेवादार देवप्रकाश मधुकर और कई अन्य आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. लेकिन इस एफआईआर में भोले बाबा का नाम शामिल नहीं है जिनका सत्संग था . वहीं पुलिस भोले बाबा की तलाश में जुटी हुई है.

अनुमति से 3 गुना ज्यादा भीड़ सत्संग में जुटी

हाथरस के सत्संग में दर्दनाक हादसे के चलते बड़ी संख्या में लोगों के मरने की खबर सामने आ रही है. मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. आपको बता दें कि इस सत्संग आयोजन में केवल 80 हजार लोगों के शामिल होने की परमिशन मिली था लेकिन अनुमति से 3 गुना ज्यादा भीड़ इस सत्संग में जुट गई. परमिशन लेते वक्त बरती गई लापरवाही हाथरस हादसे की बड़ी वजह मानी जा रही है.

कार्यक्रम में कितनी भीड़ की अनुमति ली गई थी?

आपको बता दें कि सत्संग से 8 दिन पहले ही सत्संग आयोजन समिति के प्रभारी देवप्रकाश मधुकर ने कार्यक्रम को लेकर स्थानीय एसडीएम से अनुमति ली गई थी. प्रशासन के अनुसार इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 80 हजार की भीड़ को अनुमति दी गई थी. लेकिन इस सत्संग में करीब ढाई लाख लोगों की भीड़ शामिल हो गई. ये भीड़ देश के अलग-अलग राज्यों यूपी, राजस्थान और हरियाणा से पहुंची.

क्या है अनुमति लेने की सही प्रक्रिया?

  • इस तरह के कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए एसडीएम (SDM) से परमिशन लेनी होती है. SDM से परमिशन लेने से पहले अलग-अलग विभागों से एनओसी ली जाती है.
  • इस तरह के कार्यक्रम में पुलिस और लोकल इंटेलीजेंस यूनिट कार्यक्रम का जायजा लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार करती है.
  • इसके अलावा पीडब्ल्यूडी की तरफ से एनओसी (NOC) लेनी पड़ती है. बिजली के लिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय की एनओसी भी ली जाती है.
  • इसके अलावा राजस्व की ओर से लेखपाल की एक रिपोर्ट भी लगती है. सभी विभागों की एनओसी मिलने के बाद ही संबंधित कार्यक्रम को अंतिम अनुमति मिलती है.
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