एनसीएल ककरी प्रशासक के निर्णय से कोलगेट वाशी भयभीत

एनसीएल ककरी प्रशासक के निर्णय से कोलगेट वाशी भयभीत

रेनू सागर कोलगेट से लेकर बिना रोड के दोनों तरफ दुकान एवं लगभग 40 वर्षों से आबादी बसी हुई है वर्तमान समय में बुधवार मार्केट भी वही लगती है यहां के मूल निवासी उस जमीन पर काबिज थे जिन्होंने इस जमीन को दुकानदारों एवं वहां जो बसे हैं उन्हें बेच दिया इसके संदर्भ में यहां के मूल निवासी ब्रजेश दुबे उक्त जमीन के पटे के लिए पहले ही एन सी एल आने के पुर्व ही आवेदन किए हुए है। उन्होंने इस क्षेत्र के लिए हाईकोर्ट में मुकदमा भी किए हुए हैं। जो लोग इस क्षेत्र को अबाद कर रखा है तथा उसे माध्यम से अपनी जीविका चला रहे हैं तथा उस मकान में निवास कर रहे हैं इसके संदर्भ में उसी जमीन को विगत 24 जून दुद्धी एसडी एम सुरेश राव गाटा संख्या 485 486 487 के ऊपर जो निर्माण है उसे गिराने के लिए आदेश दे दिए जबकि एनसीएल पहले ही अपनी बाउंड्री करवा कर इस जमीन को अपने बाउंड्री से बाहर कर चुकी है । भारत सरकार के ब एक्ट 1975 के तहत एनसीएल ककरी कोलब्लॉक 1982 के माध्यम से अधिकृत किया गया था जिसमें उक्त जमीन तीनों घाटा संख्या एनसीएल ककरी के नाम से खतौनी में है उक्त तीनों घाटा संख्या पर जो लोग रहते हैं उनको अतिक्रमणकारि मानकर अपनी कार्रवाई करने के लिए एसडीएम निर्णय ले लिए जिसके लिए नायब तहसीलदार ज्ञानेंद्र कुमार तहसील दुद्धी को मजिस्ट्रेट बनाकर टीम गठित कर दी गई है उक्त जमीन पर लोग एनसीएल आने के पूर्व से ही निवास कर रहे हैं यदि सरकार का निर्णय आता है तो स्थानीय निवासी एवम विस्थापित जनता आंदोलन के मार्ग पर चली जाएगी यक्ष प्रश्न यह है यहां के लोग लाखों लगाकर अपना मकान बनाए हैं या रोजगार किए हुए यह लोग कहां जाएंगे उनकी जीविका कैसे चलेगी इस पर सरकार क्या विचार कर रही है यह विचारणीय प्रश्न है । ‌डा एम ठाकुर

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