दाने-दाने को मोहताज हुआ मालदीव, भारत से लगाई गुहार

मालदीव और भारत के बीच का रिश्ता लगभग खटाई में है. लेकिन अच्छे पड़ोसी का कर्तव्य निभाते हुए भारत सरकार ने शुक्रवार को मालदीव को कई आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को मंजूरी दे दी है, जिनमें चावल, गेहूं और प्याज जैसी वस्तुएं शामिल हैं.इनके निर्यात पर वर्तमान में प्रतिबंध लगा हुआ है.

माले में भारतीय उच्चायोग ने बताया कि भारत सरकार ने मालदीव सरकार के अनुरोध पर द्विपक्षीय तंत्र के तहत 2024-25 के लिए इन वस्तुओं के निर्यात की अनुमति दी है. 1981 में समझौते लागू होने के बाद वस्तुओं का निर्यात से स्वीकृत मात्रा से काफी अधिक है.

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने एक अधिसूचना में कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत मालदीव को इन वस्तुओं के निर्यात की अनुमति दी गई है. इसमें मालदीव को अंडे, आलू, प्याज, चावल, गेहूं का आटा, चीनी, दाल, बजरी और नदी की रेत के निर्यात की अनुमति दी गई है. मालदीव को इन वस्तुओं के निर्यात को मौजूदा या भावी प्रतिबंधों से छूट दी जाएगी.

डीजीएफटी ने बताया कि आमतौर पर इन वस्तुओं के निर्यात पर या तो पूरी तरह प्रतिबंध है या सीमित निर्यात की अनुमति दी जाती है. निर्यात के लिए मंजूरी ऐसे समय में आई है, जब भारत और मालदीव के बीच संबंध निचले स्तर पर हैं. खासकर मोहम्मद मुइज्जू के मालदीव में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद. उन्होंने रणनीतिक क्षेत्रों में भारत पर भारतीय द्वीपसमूह की निर्भरता को खत्म करते हुए चीन से नजदीकियां बढ़ाई.बयान में कहा गया, ‘मालदीव में तेजी से बढ़ते निर्माण उद्योग के लिए नदी का रेत (बालू) और पत्थर समुच्चय (टाइल्स) का कोटा 25% बढ़कर 1,000 मीट्रिक टन हो गया है. साथ ही अंडे, आलू, प्याज, चीनी, चावल, गेहूं का आटा और दाल के कोटा में भी 5% की वृद्धि हुई है.

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