सारनाथ में पंचशील ध्वज लहराया, महात्मा बुद्ध को शीश नवाया…..

वैशाख पूर्णिमा पर बुद्ध पूर्णिमा के मान विधान अनुसार सोमवार को महात्मा बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ में देश भर से बौद्ध धर्मानुयायी उमड़े. विभिन्न देशों की ओर से स्थापित मंदिरों में महात्मा बुद्ध को शीश नवाया . विश्व शांति कामना से दर्शन – पूजन के साथ पंचशील ध्वज लहराते धम्म पद यात्रा निकाली . शाम के साथ विद्युत झालरों व एक हजार दीपों की रोशनी से तथागत की प्रथम उपदेश स्थली नहा उठी .सारनाथ के मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर में सुबह छह बजे महाबोधि सोसाइटी आफ इंडिया के भिक्षु शीलवंश थेरो व धम्म शिक्षण केंद्र प्रभारी भिक्षु चंदिमा के नेतृत्व में बौद्ध भिक्षुओं ने धर्म चक्र प्रवर्तन सूत्र पाठ व पूजन किया. परंपरानुसार तथागत के समक्ष सुजाता खीर रखी. इसके साथ सारनाथ के थाई बौद्ध विहार, वियतनाम बौद्ध मंदिर, कंबोडिया, जापानी बौद्ध मंदिर, चाइनीज बौद्ध मंदिर समेत समस्त मंदिरों में दर्शन-पूजन शुरू हुआ. इसके लिए नेपाल, थाईलैंड, श्रीलंका, वियतनाम के साथ ही महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, दिल्ली, बिहार और चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, कुशीनगर समेत विभिन्न जिलों से लगभग 70 हजार बौद्ध धर्म अनुयायी आए थे. सभी ने पूजन-अर्चन के बाद मिनी जू, पुरातात्विक खंडहर परिसर में धमेख स्तूप का भ्रमण किया. महाबोधि सोसाइटी परिसर में प्रसाद ग्रहण किया.

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