केजरीवाल ने कथित शराब घोटाले से जुड़े सीबीआई केस में जमानत की मांग की

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की दो याचिकाओं पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। केजरीवाल ने कथित शराब घोटाले से जुड़े सीबीआई केस में जमानत की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने सीबीआई की ओर से की गई गिरफ्तारी को भी चुनौती दी है।यदि हाई कोर्ट से केजरीवाल को जमानत मिलती है तो उनकी जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो सकता है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक को ईडी केस में पहले ही सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।

सिर्फ एक आधार पर हुई गिरफ्तारी

केजरीवाल के वकील ने कहा कि वह सीएम हैं, कोई आतंकवादी नहीं। उन्होंने पूछताछ के लिए ट्रायल कोर्ट में आवेदन दिया जिसे स्वीकार कर लिया गया। मुझे कोई नोटिस भी नहीं भेजा गया। सुनवाई के दौरान इमरान खान के मामले का जिक्र आया। सिंघवी ने केजरीवाल को गिरफ्तार करने के लिए ट्रायल कोर्ट में सीबीआई की अर्जी का हवाला दिया। उन्हें गिरफ्तार करने की केवल एक वजह बताई गई है। ट्रायल कोर्ट को इसकी अनुमति नहीं देनी चाहिए थी। इसका आधार क्या है? कि मैं संतोषजनक जवाब नहीं दे रहा हूं। मान लीजिए कि मैं कहता हूं कि मैं किसी चीज का जवाब नहीं दूंगा। मैं एक बड़ा सवाल पूछता हूं, लेकिन क्या मी लॉर्ड कहेंगे कि जवाब नहीं देने के कारण मुझे गिरफ्तार कर लिया जाए? ऐसे में अनुच्छेद 22 और 23 का क्या होगा?

मुझे किसी भी तरह जेल में रखना चाहते हैं

कोर्ट में अपनी पक्ष रखते हुए सीएम केजरीवाल ने कहा कि अंतरिम जमानत खत्म होने पर मैंने सरेंडर किया। स्पेशल जज ने 20 जून को मुझे जमानत दी। इससे साफ है कि सीबीआई के दिमाग में खलबली मच गई। मैं सीबीआई को दोष नहीं दूंगा, ऐसा किसी और के दिमाग में हुआ। उन्हें लगा की सुप्रीम कोर्ट का फैसला मेरे हक में आया और ट्रायल कोर्ट से भी जमानत मिल गई। उन्होंने मुझे फिर ट्रायल कोर्ट के सामने पेश करके अरेस्ट कर लिया। इस महीने सुप्रीम कोर्ट ने मुझे जमानत दे दी। लेकिन मैं इस इंश्योरेंस अरेस्ट की वजह से वापस बैरक में पहुंच गया। वे साम-दाम-दंड-भेद हर तरीके से चाहते हैं कि मैं जेल में ही रहूं।
मुझे गिरफ्तार करने की कोई जरूरत या मंशा नहीं थी। लेकिन गिरफ्तार सिर्फ इस वजह से किया गया ताकि जेल के अंदर रखा जा सके।

आचार संहिता लागू होने के बाद किया अरेस्ट

कोर्ट में सिंघवी ने दलील देते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल को जमानत दे दी थी लेकिन हाईकोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी। वहीं केजरीवाल ने कहा, ‘2023 के आठ महीने बीत जाने पर उन्होंने मुझे गिरफ्तार करने या पूछताछ करने के लायक नहीं समझा। इसके बाद 2024 में भी तीन महीने बीत गए। 21 मार्च 2024 को, आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद, मुझे ईडी गिरफ्तार करती है। ईडी हिरासत में रहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मुझे तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत दी। सुप्रीम कोर्ट को नहीं लगता कि मैं सबूतों से छेड़छाड़ करूंगा, गवाहों को प्रभावित करूंगा या देश छोड़कर भाग जाऊंगा।’

नीना बंसल कृष्णा की बेंच के सामने केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी, एन हरिहरन और विक्रम चौधरी, जबकि सीबीआई की ओर से डीपी सिंह पेश हुए। सिंघवी ने कहा, ‘दुर्भाग्य से यह इंश्योरेंस अरेस्ट है। साफ तौर पर सीबीआई गिरफ्तार नहीं करना चाहती थी और ना ही उनके पास मैटेरियल था। लेकिन सीबीआई ने महसूस किया कि वह दूसरे केस में बाहर आ सकते हैं और इसलिए गिरफ्तार कर लिया। बेहद सख्त प्रावधानों के बावजूद मेरे पक्ष में रिहाई के दिन आदेश हैं। पहले सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव में प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दी। हाल ही में फिर अंतरिम जमानत मिली। एक आदेश ट्रायल कोर्ट से आया जिस पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी।’

सीबीआई से मांगा था जवाब
इससे पहले 5 जुलाई को कोर्ट ने सीबीआई से जवाब मांगते हुए 17 जुलाई को सुनवाई की तारीख दी थी। केजरीवाल को सीबीआई ने 26 जून को गिरफ्तार किया था, जब वह पहले से ईडी केस की वजह से न्यायिक हिरासत में थे। ट्रायल कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को अवैध करार देने से इनकार किया था। इसके बाद केजरीवाल ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पिछली सुनवाई पर सीबीआई ने कोर्ट से कहा था कि केजरीवाल ने जमानत के लिए निचली अदालत में याचिका दायर नहीं की है, वह सीधे हाई कोर्ट आ गए हैं।

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