सोन नदी में नहाने गए तीन किशोर डूबे, तलाश जारी; मंत्री बोले- मानव क्षति की भरपाई संभव नहीं।
सोन नदी में नहाने गए तीन किशोर डूबे, तलाश जारी; मंत्री बोले- मानव क्षति की भरपाई संभव नहीं।

संवाददाता सद् दाम कुरैशी
चोपन/सोनभद्र। चोपन थाना क्षेत्र के मीतापुर ग्राम पंचायत में सोन नदी में नहाने के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में तीन किशोरों के डूब जाने से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। डूबने वाले किशोरों की पहचान संदीप (18 वर्ष), बोल बम (16 वर्ष) और दीपक (15 वर्ष) के रूप में हुई है। समाचार लिखे जाने तक तीनों की तलाश जारी थी। स्थानीय गोताखोरों तथा एसडीआरएफ की टीम द्वारा नदी में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए और राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी शुरू कर दी। हादसे के बाद समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव कुमार गोंड घटनास्थल पहुंचे तथा पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। मंत्री ने कहा कि बच्चों की क्षति की भरपाई कोई नहीं कर सकता, लेकिन सरकार हर परिस्थिति में परिवारों के साथ खड़ी है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगी। मंत्री ने घटना को लेकर हो रही राजनीति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि दुःख की इस घड़ी में राजनीति नहीं बल्कि पीड़ित परिवारों की सहायता प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की शिकायत या आरोप हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मौके पर मौजूद अपर पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार ने बताया कि मीतापुर में सोन नदी में नहाने के दौरान तीन किशोर गहरे पानी में चले गए, जिससे वे डूब गए। सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई। उन्होंने पुलिस द्वारा किसी को दौड़ाने या धक्का देने की बात को अफवाह बताते हुए खारिज किया।

एएसपी ने लोगों से नदी एवं गहरे जलाशयों के आसपास विशेष सावधानी बरतने की अपील की।अपर जिलाधिकारी बागेश शुक्ला ने बताया कि सुबह सूचना मिलने के बाद पहले स्थानीय गोताखोरों को लगाया गया, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर एसडीआरएफ को बुलाकर व्यापक खोज अभियान शुरू कराया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता बच्चों को जल्द से जल्द खोज निकालना है। एडीएम ने बताया कि आपदा राहत निधि के तहत मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। साथ ही घटना के कारणों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।इस बीच निषाद समाज के प्रतिनिधियों ने हादसे के लिए अवैध बालू खनन को जिम्मेदार ठहराते हुए पीड़ित परिवारों को 50 लाख रुपये मुआवजा देने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। सुभासपा पिछड़ा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष जितेंद्र निषाद ने आरोप लगाया कि भारी मशीनों से हो रहे अवैध खनन के कारण नदी में गहरे गड्ढे और दलदली क्षेत्र बन गए हैं, जिससे यह हादसा हुआ। उन्होंने कहा कि निषाद समाज पिछले कई महीनों से अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन को ज्ञापन देता रहा है।
निषाद समाज के नेता रोहित कुमार बिंद ने भी अवैध खनन को घटना का प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि लगातार शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने हादसे की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग की। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। जिला प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नदियों, डैमों और अन्य जोखिम वाले जलाशयों के किनारे चेतावनी बोर्ड लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस मौके पर पूर्व सांसद नरेंद्र कुशवाहा, राज्य मंत्री जीत सिंह खरवार, भाजपा मंडल अध्यक्ष संजय केशरी, थाना प्रभारी निरीक्षक गोपाल जी गुप्ता, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि शिवेंद्र साहनी, हिमांचल साहनी,प्रदीप निषाद सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
