सोनभद्र में उपभोक्ताओं की जेब पर डाका: कोल्ड्रिंक्स पर एमआरपी से 5से 10रुपए तक की ज्यादा वसूली, विरोध करने पर दुकानदारों की दबंगई।
सोनभद्र में उपभोक्ताओं की जेब पर डाका: कोल्ड्रिंक्स पर एमआरपी से 5से 10रुपए तक की ज्यादा वसूली, विरोध करने पर दुकानदारों की दबंगई।

स्टेट हेड कार्यालय
*सोनभद्र।* जिले के कोन थाना क्षेत्र के रामगढ़, सलैयाडीह, कोन और कचनरवा इलाकों में इन दिनों उपभोक्ताओं के साथ खुला आर्थिक शोषण चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। आरोप है कि यहां दुकानदार खुलेआम कोल्ड ड्रिंक की बोतलों पर छपे अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक पैसे वसूल रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जब ग्राहक इस अवैध वसूली का विरोध करते हैं, तो दुकानदार बेहिचक कहते हैं कि “कोल्ड ड्रिंक को ठंडा करने का चार्ज अलग से लिया जाता है।” यह तर्क न सिर्फ उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि सीधे तौर पर कानून की अवहेलना भी है।
दबंगई की हद: ‘जहां शिकायत करनी है कर दो’
मामला तब और गंभीर हो जाता है जब दुकानदारों की ओर से कथित रूप से यह तक कहा जाता है कि वे “फूड इंस्पेक्टर को मैनेज करके चलते हैं” और उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उपभोक्ताओं को खुलेआम चुनौती दी जा रही है कि जहां शिकायत करनी है कर लें, कोई कार्रवाई नहीं होगी।
यह बयान न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावित जड़ों की ओर भी इशारा करता है।
कानून क्या कहता है?
कानूनी रूप से किसी भी उत्पाद को एमआरपी से अधिक कीमत पर बेचना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, 2009 के तहत दंडनीय अपराध है। दोषी पाए जाने पर दुकानदारों पर जुर्माना, लाइसेंस रद्द होने तक की कार्रवाई हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, “ठंडा करने का चार्ज” जैसा कोई अलग शुल्क लेना पूरी तरह गैरकानूनी है, क्योंकि एमआरपी में सभी खर्च पहले से शामिल होते हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
लगातार सामने आ रही शिकायतों के बावजूद स्थानीय प्रशासन और खाद्य विभाग की चुप्पी लोगों के मन में संदेह पैदा कर रही है। क्या वाकई अधिकारियों की मिलीभगत है, या फिर शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है?
उपभोक्ताओं की मांग: तत्काल कार्रवाई हो
क्षेत्रीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि:
तत्काल छापेमारी कर दोषी दुकानदारों पर कार्रवाई की जाए
उपभोक्ताओं से अधिक वसूली का पैसा वापस कराया जाए
संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो
अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
निष्कर्ष
सोनभद्र के इन इलाकों में हो रही यह मनमानी सिर्फ कुछ दुकानदारों की हरकत नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही की भी परीक्षा है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस खुलेआम हो रही लूट पर कब और कैसे लगाम लगाते हैं।
