राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग को एक सीधा अल्टीमेटम दिया

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग को एक सीधा अल्टीमेटम दिया है। वो ये कि चीन अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में मदद करना शुरू करें, वरना राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली आगामी उच्च-स्तरीय शिखर वार्ता शायद न हो पाए।
राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब यह महत्वपूर्ण जलमार्ग अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण प्रभावी रूप से अवरुद्ध बना हुआ है। बता दें कि यहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है।
‘चीन को अपना 90% तेल यहीं से मिलता है’
रविवार को फाइनेंशियल टाइम्स से बात करते हुए, ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि इस मार्ग को सुरक्षित करने का बोझ केवल अमेरिकी कंधों पर ही नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिमी एशिया के कच्चे तेल पर चीन की भारी निर्भरता की ओर इशारा किया, ताकि यह समझाया जा सके कि बीजिंग को अब किनारे पर खड़े रहने के बजाय आगे क्यों आना चाहिए।
ट्रंप ने अखबार से कहा, ‘मुझे लगता है कि चीन को भी मदद करनी चाहिए, क्योंकि चीन अपना 90% तेल इसी जलडमरूमध्य से हासिल करता है।”यह बिल्कुल सही है कि जो लोग इस जलडमरूमध्य से फायदा उठाते हैं, वे यह सुनिश्चित करने में मदद करें कि वहां कुछ भी बुरा न हो।’
हालांकि ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि 90% का आंकड़ा ट्रंप की खास शैली का एक उदाहरण है,ज्यादातर अनुमानों के मुताबिक, चीन की इस जलडमरूमध्य पर निर्भरता 45-50% के करीब है लेकिन खैर ये साफ हो गया है कि अमेरिका दुनिया की समुद्री पुलिस बनकर मुफ्त में काम करते-करते थक चुका है।
क्या शिखर सम्मेलन खटाई में पड़ गया है?
यह दबाव महज बयानबाजी नहीं है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि इस महीने के आखिर में शी चिनफिंग के साथ होने वाली प्रस्तावित बैठक जिसका मकसद व्यापारिक मोर्चे पर बनी डांवाडोल शांति को मजबूती देना था, अब वह मोलभाव का एक जरिया बन गई है।
ट्रंप ने कहा, ‘हम शिखर सम्मेलन से पहले [बीजिंग का रुख] जानना चाहेंगे।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या बैठक को आगे बढ़ाया जा सकता है, तो उन्होंने सीधे तौर पर कहा: टहो सकता है कि हम इसमें देरी करें।’ बता दें कि ट्रंप सिर्फ चीन से ही मदद नहीं मांग रहे हैं; वह फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और UK को शामिल करते हुए एक टीम प्रयास का आह्वान कर रहे हैं।
