नेपाल की पहली महिला PM बनीं सुशीला कार्की,दुनिया ने ‘Gen Z आंदोलन’ का नाम दिया

सोशल मीडिया बैन के ख़िलाफ़ 8 सितंबर को नेपाल में युवाओं के आंदोलन ने देश का नेतृत्व महज़ चार दिनों में ही बदल दिया. युवाओं के इस आंदोलन को दुनिया ने ‘Gen Z आंदोलन’ का नाम दिया.
शुक्रवार रात क़रीब 9:30 बजे सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार का प्रधानमंत्री नियुक्त गया. राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उन्हें शपथ दिलाई.
युवाओं की पहली पसंद सुशीला कार्की नहीं थीं. युवाओं की पहली पसंद काठमांडू के मेयर बालेन शाह थे, जिन्होंने इस आंदोलन का आह्वान दिया था. बालेन ने सत्ता संभालने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद सुशीला का नाम सामने आया. फिर बालेन ने भी अपना समर्थन सुशीला को दिया. जिसके बाद नेपाल में सियासी संकट पर विराम लगा. Gen Z आंदोलनकारियों के बीच वह लोकप्रिय रही हैं. वह नेपाल की पहली महिला प्रधान न्यायधीश रह चुकी हैं. उनकी छवि भ्रष्टाचार विरोधी रही है. नेपाल में सुशीला महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं.
सुशीला कार्की के हाथों में नेपाल की कमान केवल इन्हीं कारणों से नहीं दी गई. इसके अलावा भी कई फैक्टर्स अहम रहे हैं, जिसकी वजह से वह अब आने वाले महीनों के लिए नेपाल का नेतृत्व करेंगी.
Gen-Z प्रदर्शनकारियों की इन को शर्तें सुशीला कार्की ने माना
1. Gen Z आंदोलनकारियों की मांग थी कि 6 से 12 महीने के भीतर देश में आम चुनाव कराए जाएं. ताकि लोकतंत्र स्थापित हो और जनता अपनी इच्छा से नयी सरकार को चुन सके. सुशीला कार्की ने आंदोलनकारियों की इस मांग को मान लिया है.
