संयोजक अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर भाजपा की कार्यप्रणालियों पर तीखे सवाल उठाए

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर भाजपा की कार्यप्रणालियों पर तीखे सवाल उठाए हैं।
इस पत्र में उन्होंने भाजपा के कथित कार्यों और उनके लोकतंत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर आरएसएस के रुख पर स्पष्टीकरण मांगा है।
केजरीवाल ने अपने पत्र में सीधे-सीधे पूछा कि क्या आरएसएस भाजपा के उन कृत्यों का समर्थन करता है। जो कथित रूप से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करते हैं। उन्होंने वोट खरीदने, मतदाता सूची में छेड़छाड़ और दलित व पूर्वांचली मतदाताओं को लक्षित तरीके से वंचित करने जैसे मुद्दों को उठाया। केजरीवाल ने सवाल किया कि क्या आरएसएस को लगता है कि यह लोकतंत्र के लिए सही है। क्या भाजपा द्वारा लोकतंत्र को कमजोर करने वाले कदमों पर आरएसएस की सहमति है
आप ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
आप प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने भी भाजपा पर दिल्ली में मतदाता सूची में छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि शादरा निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा नेता विशाल भारद्वाज ने मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की थी। जिसे आप के हस्तक्षेप के बाद रोका गया।
इसके अलावा भाजपा नेता प्रवेश शर्मा पर नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं को रिश्वत देने और संदिग्ध मतदाता पंजीकरण गतिविधियों में शामिल होने का भी आरोप लगाया गया। कक्कड़ ने इसे चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए भाजपा की बेताबी करार दिय
मुख्य निर्वाचन अधिकारी का आश्वासन
मतदाता सूची में छेड़छाड़ के आरोपों पर दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्थिति को स्पष्ट करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि मसौदा मतदाता सूची से संबंधित सभी मुद्दों को 24 दिसंबर तक हल कर लिया जाएगा। 6 जनवरी 2025 को अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी। ताकि मतदाता सूचियों की निष्पक्षता और सटीकता सुनिश्चित की जा सके।
2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले बढ़ता तनाव
जैसे-जैसे 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं। आप और भाजपा के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता तेज हो गई है। केजरीवाल का भागवत को पत्र और मतदाता सूची विवाद इस तनावपूर्ण माहौल को और गहरा कर रहे हैं।
केजरीवाल का पत्र भाजपा पर गंभीर आरोपों की झड़ी लगाते हुए यह सवाल उठाता है कि क्या आरएसएस लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की गिरावट पर मौन रहेगा। वहीं भाजपा पर लगे आरोप मतदाता सूचियों की सटीकता और चुनावी निष्पक्षता के प्रति जनता की चिंताओं को बढ़ा रहे हैं।
आप और भाजपा के बीच जारी राजनीतिक खींचतान दिल्ली चुनावों से पहले राजनीतिक परिदृश्य को गर्मा रही है। आरएसएस प्रमुख को लिखे गए केजरीवाल के पत्र ने इस संघर्ष को और धार दे दी है। जबकि मतदाता सूची विवाद ने लोकतंत्र की नींव पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह घटनाक्रम महज चुनावी प्रतिस्पर्धा से आगे जाकर लोकतंत्र, कानून और जनता के विश्वास के मूल सिद्धांतों को प्रभावित करने वाले बड़े मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करता है। 2025 के चुनावी नतीजे न केवल दिल्ली की राजनीति बल्कि भारतीय लोकतंत्र के भविष्य पर भी असर डाल सकते हैं।
