खरगे ने पीएम पर लगाया गलतबयानी का आरोप, कहा- मांगे माफी

राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तथ्यों को तोड़- मरोड़ कर पेश करने और पंडित जवाहर लाल नेहरु, सरदार पटेल, बाबा साहब आंबेडकर के साथ ही श्यामा प्रसाद मुखर्जी को अपमानित करने का आरोप लगाया।उन्होंने कहा पीएम ने लोकसभा में जिस पहले संविधान संशोधन का जिक्र किया है, वह आरक्षण को लेकर था। न कि किसी परिवार को फायदा पहुंचाने के लिए था। यह संशोधन अंतरिम सरकार और अंतरिम संसद ने संविधान सभा की सिफारिश पर किया था, इसमें श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी शामिल थे।
देश में कोई निर्वाचित सरकार नहीं थी
देश को उन्होंने गुमराह किया है। पीएम को इस गलतबयानी के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए। खरगे ने कहा कि पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा था कि 1947 से 1952 के बीच देश में कोई निर्वाचित सरकार नहीं थी और कांग्रेस ने अवैध रूप से संविधान संशोधन किया था।
राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र
खरगे ने कहा कि यह संविधान संशोधन सुप्रीम कोर्ट के आरक्षण को लेकर दिए एक फैसले के बाद किया गया था। उन्होंने कहा कि इस संशोधन का दूसरा पहलू सांप्रदायिक प्रचार को रोकना था। सरदार पटेल ने तीन जुलाई 1950 को नेहरू को पत्र लिखकर ऐसा करने का सुझाव दिया था। नेहरू ने इसके बाद ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा था।
आजादी और संविधान का महत्व
खरगे ने इस दौरान आरएसएस पर भी तीखा हमला बोला और कहा कि उन्होंने देश के संविधान व तिरंगे का शुरू से ही विरोध किया। उन पर संविधान को जलाने का आरोप लगाया और कहा कि वह भारतीय संविधान को ‘ मनु स्मृति’ के मुताबिक तैयार कराना चाहते थे, जो नहीं हुआ। आरएसएस ने तो 26 जनवरी 2002 के बाद तिरंगे को मजबूरी में फहराना शुरू किया। खरगे ने कहा कि ‘जो देश के लिए लड़े नहीं, खून-पसीना नहीं बहाया, वे आजादी और संविधान के महत्व को कैसे जानेंगे?’
खरगे ने कहा कि भाजपा आरक्षण के खिलाफ है, इसीलिए वह जातीय गणना के खिलाफ है। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस की सरकार आएगी तो भाजपा से ज्यादा तेजी से महिला आरक्षण को लागू करेगी। उन्होंने मणिपुर का मुद्दा भी उठाया।
कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि चर्चा के दौरान आपातकाल को सभी कोस रहे है। निश्चित ही यह एक गलती है। कांग्रेस ने इसे कई बार स्वीकार किया है। लेकिन यह असंवैधानिक नहीं था। यह संविधान की एक विकृति थी। लेकिन आज तो अघोषित आपातकाल की स्थिति है। जहां सरकार ने तीन एजेंसियों के साथ साझेदारी कर रखी है। जहां कोई उसके खिलाफ कुछ बोलता है कि तो तुरंत ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स के छापे पड़ जाते है।
