पाकिस्तान ने कर दिया 8वां अजूबा! बेचने लगा JF-17 फाइटर जेट

पाकिस्तान ने दुनिया का आठवां अजूबा कर दिया है. यह कहना गलत नहीं होगा क्योंकि पूरा देश गिरवी पड़ा है और उसने एक अन्य मुल्क को JF-17 फाइटर जेट बेचा है. पाकिस्तानी सेना ने 26 सितंबर को जारी एक बयान में कहा कि हाल ही में अजरबैजान को “जेएफ-17 ब्लॉक-III लड़ाकू विमान की बिक्री के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट” पर साइन किए गए थे.
अब अजरबैजान ने पाकिस्तान से 1.6 बिलियन डॉलर के सौदे में खरीदे गए इन लड़ाकू विमानों को अपने एयर फोर्स फ्लीट में शामिल किया है.
हैदर अलीयेव अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 25 सितंबर को अजरबैजान के रक्षा मंत्री जाकिर हसनोव की मौजूदगी में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव को औपचारिक रूप से लड़ाकू विमान सौंपे जाने के बाद अजरबैजान के राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान में कहा, “इन विमानों को अजरबैजान की वायु सेना में पहले ही शामिल कर लिया गया है.”
बाकू में अजरबैजान इंटरनेशनल डिफेंस एग्जीबिशन 2024 के दौरान आयोजित इस सेरेमनी में पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स बोर्ड के अध्यक्ष एयर वाइस मार्शल हकीम रजा ने राष्ट्रपति अलीयेव को लड़ाकू विमान की एडवांस और तकनीकी खूबियों, ऑपरेशनल गाइडलाइंस और की परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स के बारे में जानकारी दी. राष्ट्रपति अलीयेव की एक तस्वीर भी JF-17C ब्लॉक III लड़ाकू विमान के अंदर बैठे हुए ली गई.
म्यांमार और नाइजीरिया के बाद अजरबैजान पाकिस्तान से जेएफ-17 लड़ाकू विमान खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है. लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही थीं कि इराक पाकिस्तान से जेएफ-17 खरीदने पर विचार कर रहा है. ऐसा माना जाता है कि इस साल फरवरी में इस समझौते पर साइन किए गए थे.
पाकिस्तानी सेना की ओर से कहा गया है कि जुलाई में इस्लामाबाद की अपनी यात्रा के दौरान अज़रबैजान के राष्ट्रपति को फाइटर प्लेन की “लड़ाकू ताकतों और रोजगार विकल्पों के बारे में जानकारी दी गई थी”. इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति अलीयेव ने उस मौके पर इस सौदे की तारीफ करते हुए कहा था कि यह “पाकिस्तान और अज़रबैजान के बीच मौजूदा सैन्य सहयोग को मजबूत करने और करीबी रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने में एक लंबा रास्ता तय करेगा”.
अजरबैजान को पाकिस्तान से जेएफ-17 फाइटर जेट मिलना भारत के नजरिए से कोई खास महत्व नहीं रखता, लेकिन इसे नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता. अजरबैजान के साथ भारत के रिश्ते उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं और पाकिस्तान संग भारत का रिश्ता किसी से छिपा नहीं है. ऐसे में पाकिस्तान और अजरबैजान का यह गठजोड़ भारत के लिए शुभ संकेत तो कहीं से भी नहीं है.
