मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी अनुसूचित जातियों के उप-वर्गीकरण की अनुमति देने वाले सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से ‘सहमत नहीं

बसपा की अध्यक्ष और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी अनुसूचित जातियों के उप-वर्गीकरण की अनुमति देने वाले सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से ‘सहमत नहीं है.’उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लोगों के उप-वर्गीकरण की अनुमति दी गई है. हमारी पार्टी इससे बिल्कुल सहमत नहीं है.

फैसले पर पुनर्विचार करें सुप्रीम कोर्ट: मायावती

मायावती ने कहा, क्योंकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों द्वारा अत्याचारों का सामना एक समूह के रूप में किया गया है. यह समूह समान है, इसलिए किसी भी तरह का उप-वर्गीकरण करना सही नहीं होगा. उन्होंने कहा, हमने माननीय सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वो अपने फैसले पर पुनर्विचार करें. वरना इस देश में जो करोड़ों दलित और आदिवासी समाज के लोग हैं, उनको पैरों पर खड़ा करने के लिए परम पूज्य बाबा साहब बी आर आंबेडकर ने जो आरक्षण की सुविधा दी थी. अगर यह खत्म हो गयी तो बड़ा मुश्किल हो जाएगा.

आरक्षण खत्म हो गया, तो बहुत बुरा होगा

बसपा प्रमुख ने कहा, जो लोग कहते हैं कि एससी-एसटी (अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति) हर मामले में आर्थिक रूप से मजबूत हो गए हैं. तो उसमें मैं समझती हूं कि 10 या 11 प्रतिशत लोग ही मजबूत हुए होंगे, बाकी 90 प्रतिशत लोगों की हालत तो बहुत ज्यादा खराब है. उन्होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से लगभग 90 प्रतिशत लोग जिनको आरक्षण की जरूरत है. वो तो बहुत ज्यादा पिछड़ जाएंगे. उनको इस फैसले के अनुसार अगर निकाल दिया जाएगा, तो यह बहुत बुरा होगा.

मायावती ने सत्तारूढ़ दल और कांग्रेस पर निशाना साधा

मायावती ने सत्तारूढ़ दल और कांग्रेस पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा- केंद्र और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जो कहते हैं कि हम एससी-एसटी समाज के हिमायती हैं. उनको पहले इनकी पैरवी सही तरीके से करनी चाहिए, जोकि उन्होंने नहीं की. कांग्रेस ने भी इस मामले को लेकर ढुलमुल रवैया अपनाया. उन्होंने कहा, ऐसी स्थिति में केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार से हमें कहना है कि यदि आपकी नीयत साफ है, तो यह जो भी फैसला आया है. उसे संसद के अंदर आप लोग संविधान में संशोधन करें और संविधान की नौंवी सूची में लाएं.

सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण पर क्या फैसला सुनाया?

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को एक ऐतिहासिक फैसले में कहा- कि राज्यों को अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण करने का संवैधानिक अधिकार है. ताकि उन जातियों को आरक्षण प्रदान किया जा सके जो सामाजिक और शैक्षणिक रूप से अधिक पिछड़ी हैं. हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि राज्यों को पिछड़ेपन और सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व के ‘मात्रात्मक और प्रदर्शन योग्य आंकड़ों’ के आधार पर उप-वर्गीकरण करना होगा.

अनुसूचित जातियों को उप-वर्गीकरण की अनुमति नहीं

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली सात-सदस्यीय संविधान पीठ ने 6:1 के बहुमत के फैसले के जरिये ”ई वी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश सरकार” मामले में शीर्ष अदालत की पांच-सदस्यीय पीठ के 2004 के फैसले को खारिज कर दिया. फैसले में कहा गया था कि अनुसूचित जातियों (एससी) के किसी उप-वर्गीकरण की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि वे अपने आप में स्वजातीय समूह हैं.

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पंकज मिथल ने एक अलग फैसले में बृहस्पतिवार को कहा- कि आरक्षण नीति पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है और अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) तथा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लोगों के उत्थान के लिए नए तरीकों की जरूरत है.

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