दुश्मनों से टक्कर लेते शहीद हुए बिजेंद्र सिंह दौराता पिता गए थे खेत पर लौटे तो देखा घर के बाहर लगा टेंट ,मिली ऐसी खबर

देश की हिफाजत में अपनी जान दे दे. दुश्मनों से टक्कर लेते हुए शहीद होने वाले जवानों के घरवाले जिंदगीभर अपने लाल पर गर्व करते हैं. लेकिन इस गर्व के पीछे छिपा होता है एक दर्द, जो अपने बेटे को खोने के बाद जिंदगीभर के लिए रह जाता है.झुंझुनूं के दो लाल एक बार फिर जम्मू कश्मीर में हुए आतंकी हमले में शहीद हो गए. इनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर उनके गांव आया.
हमले में शहीद हुए बिजेंद्र सिंह दौराता डूमोलीकलां निवासी थे. उनके शहीद होने की जानकारी उनके छोटे भाई को थी. लेकिन घरवालों को इसके बारे में नहीं बताया गया था. छोटा भाई दशरथ सिंह भी सेना में ही है. वो लखनऊ में पोस्टेड हैं. सिर्फ उन्हें ही अपने भाई की शाहदत की जानकारी थी.
बिजेंद्र सिंह दौराता के घरवालों को अपने बेटे की शाहदत की जानकारी नहीं थी. बुधवार को उनके पिता सुबह खेत पर काम करने गए थे. जब लौटे तब उनके घर के बाहर जवान टेंट लगा रहे थे. तब जाकर उन्हें पता चला कि अब उनका बेटा कभी लौटकर छुट्टियों में घर नहीं आएगा. अब वो आ रहा है, वो भी तिरंगे से लिपटकर. इसके बाद घर में कोहराम मच गया. शहीद की मां और पत्नी के आंसू थम ही नहीं रहे हैं.
हमले में शहीद हुए बिजेंद्र की पत्नी के आंसू रुक नहीं रहे हैं. उन्होंने बताया कि एक दिन पहले शाम को उनकी कॉल पर बातचीत हुई थी. तब बिजेंद्र ने बताया था कि वो एक ऑपरेशन पर जा रहे हैं. आकर बात करेंगे. लेकिन उसके बाद उनका कॉल नहीं आया. शहीद के दो बच्चे हैं. एक की उम्र चार साल तो दूसरे की एक साल है.
