आखिर आदिवासी बहुल क्षेत्र सोनभद्र और झारखंड को एकमात्र सवारी गाड़ी चुनार चोपन बरवाडीह पैसेंजर मिलेगी कब

आखिर आदिवासी बहुल क्षेत्र सोनभद्र और झारखंड को एकमात्र सवारी गाड़ी चुनार चोपन बरवाडीह पैसेंजर मिलेगी कब

संवाददाता अजय गुप्ता

विंढ़मगंज सोनभद्र स्थानीय रेलवे स्टेशन जो तीन राज्यों को टच करती है तथा यहां आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है अति संवेदनशील क्षेत्र है जबकि विंढ़मगंज रेलवे स्टेशन पर कोरोना काल (कॉविड 19 )के पहले चुनार चोपन बरवाडी पैसेंजर हमेशा प्रतिदिन आती जाती थी जो आदिवासियों तथा अति गरीब लोगों के लिए एकमात्र पैसेंजर था जो जिला सोनभद्र पर चाहे वह न्यायालय के काम हो चाहे व्यापार, इलाज का काम हो चाहे शिक्षा के या अन्य काम हो प्रतिदिन लोग सैकड़ो के संख्या में आवागमन करते थे यही नहीं विढ़मगंज रेलवे स्टेशन झारखंड राज्य के सैकड़ो गांव को भी अपने यहां आवागमन के लिए एकमात्र स्टेशन है विंढ़मगंज से गाड़ी पड़कर पलामू जिले को जाते थे वहां भी लोग न्यायालय के काम या शिक्षा या रोजगार, बीमारी संबंधित कार्य किया करते थे लेकिन मौजूदा दौर में जब से गाड़ियां शुरू हुई तब से संचालन बंद हुआ है लेकिन चुनार चोपन बरवाडीह पैसेंजर का सुचारू रूप से चालू न करना किस ओर इशारा कर रहा है यह लोगों को समझ में नहीं आ रहा है वही पलामू के सांसद बीडी राम ने कई बार संसद में भी मामला को चुनार चोपन बरवाडी पैसेंजर को चालू संबंधित बात उठाई थी लेकिन किन वजह से संबंधित अधिकारी सासद को भी बात नहीं सुन रहे हैं यह आदिवासी बहुल क्षेत्र में चर्चा का विषय है अभी कुछ माह पूर्व रेलवे स्टेशन विंढ़मगंज में कई गाड़ियों का ठहराव को लेकर बड़े स्तर पर आंदोलन हुआ था जो पहले चला करता था जिसको बंद कर दिया गया था इस बाबत ट्रेन संचालन को लेकर बड़ी संख्या में आंदोलन हुई थी जिसमें तमाम संगठनों के लोग शिरकत किए थे इतनी बड़ी तादात में लोगों को इतने पाबंदी के बाद भी घर से निकलकर और रेलवे स्टेशन क्षेत्र को बैरिकेडिंग किया गया था इसके बावजूद भी लोगों ने निकलकर बहुत बड़ी धरना का संचालन किया था जिसको लेकर शासन के लोगों के पांव फूल गए थे उस समय सोनभद्र उत्तर प्रदेश के वर्तमान सांसद पकौड़ी लाल कोल तथा झारखंड राज्य के सांसद बीडी राम ने सभी गाड़ियों का इस रूट पर संचालन के लिए आश्वासन दिया था, वही रेल रोको संघर्ष समिति विंढ़मगंज के अध्यक्ष एडवोकेट रमेश सिंह ने कहा कि हम लोग कुछ दिन और सहन कर रहे हैं अगर गाड़ियां समय से पहले नहीं मिली तो इस क्षेत्र के विभिन्न संगठनों के साथ मिलकर बड़ी रणनीति के तहत आंदोलन करने को बाध्य होंगे वही बताया जाता है कि जब आंदोलन किया गया था तो मात्र एक गाड़ी पटना सिंगरौली एक्सप्रेस मिला था जबकी अन्य गाड़ियों का भी संचालन और ठहराव की बात कही गई थी लेकिन अभी तक गाड़ी अन्य पैसेंजर जो चालू हुआ मौजूदा दौर में उसमें भी इस क्षेत्र के पैसेंजर चुनार चोपन बरवाडीह,तथा विंढ़मगंज में ठहराव रांचीचोपन एक्सप्रेस,का नाम नहीं है इस बात को लेकर आदिवासी बहुल क्षेत्र सोनभद्र में तथा सटे झारखंड राज्य में भी काफी नाराजगी व्याप्त है

Above Reporter Photo
[embedyt] https://www.youtube.com/embed?listType=playlist&list=UCYzEYpxh613jPw3luW3xiQA&layout=gallery[/embedyt]