इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा का विरासत टैक्स को लेकर दिए गए बयान ने एक नई बहस छेड़ दी

लोकसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। मंगलसूत्र और संपत्ति को लेकर अभी वार-पलटवार थमा भी नहीं था कि इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा का विरासत टैक्स को लेकर दिए गए बयान ने एक नई बहस छेड़ दी है।दरअसल सैम पित्रोदा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह अमेरिका के विरासत टैक्स का जिक्र कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि अमेरिका में विरासत टैक्स लगता है जो काफी दिलचस्प कानून है। भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है। लेकिन मुझे लगता है कि इस पर चर्चा होनी चाहिए। इस बयान के बाद बीजेपी हमलावर हो गई है। लेकिन कांग्रेस खुलकर पित्रोदा के बचाव में उतर आई है। सैम पित्रोदा के बयान पर बीजेपी के हंगामे पर कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हमारे देश में संविधान है। हमारी ऐसी कोई मंशा नहीं है। बीजेपी सिर्फ वोट के लिए ऐसा कर रही है।अमित शाह ने दिया जवाब वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सैम पित्रोदा के बयानों से कांग्रेस पूरी तरह बेनकाब हो गई है। उन्होंने कहा कि अब इनके मेनिफेस्टो बनाने में सैम पित्रोदा की अहम भूमिका है। अमित शाह ने कहा, “सैम पित्रोदा की टिप्पणी के बाद कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से बेनकाब हो गई है। सबसे पहले उनके घोषणापत्र में ‘सर्वेक्षण’ का जिक्र, मनमोहन सिंह का पुराना बयान जो कांग्रेस की विरासत है कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार अल्पसंख्यकों का है, और अब सैम पित्रोदा की अमेरिका का हवाला देते हुए की गई टिप्पणी कि धन के बंटवारे पर विचार-विमर्श होना चाहिए। अब जब पीएम मोदी ने यह मुद्दा उठाया, तो राहुल गांधी, सोनिया गांधी और पूरी कांग्रेस पार्टी बैकफुट पर है कि यह उनका मकसद कभी नहीं था। सैम पित्रोदा के बयान से कांग्रेस का मकसद देश के सामने स्पष्ट हो गया है कि वे देश की जनता की निजी संपत्ति का सर्वेक्षण कर उसे सरकारी संपत्ति में बांटना चाहते हैं, कांग्रेस को या तो इसे अपने घोषणा पत्र से वापस लेना चाहिए या स्वीकार करें कि यह वास्तव में उनका इरादा है। मैं चाहता हूं कि लोग सैम पित्रोदा के बयान को गंभीरता से लें। उनका इरादा अब सबके सामने है, इसका संज्ञान लोगों को लेना चाहिए।”

सैम पित्रोदा ने क्या कहा इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने अमेरिका के शिकागो में कहा है कि ‘अमेरिका में विरासत टैक्स लगता है। अगर किसी के पास 100 मिलियन डॉलर की संपत्ति है और जब वह मर जाता है तो वह केवल 45 फीसदी हिस्सा ही अपने बच्चों को ट्रांसफर कर सकता है। बाकी का 55 फीसदी सरकार द्वारा ले लिया जाता है। यह एक दिलचस्प कानून है। यह कहता है कि आपने अपनी पीढ़ी में संपत्ति बनाई और अब आप जा रहे हैं, आपको अपनी संपत्ति जनता के लिए छोड़नी चाहिए- पूरी नहीं, आधी। ये जो निष्पक्ष कानून है मुझे अच्छा लगता है।’

इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा, ‘हालांकि भारत में आपके पास ऐसा नहीं है। अगर किसी की संपत्ति 10 बिलियन है और वह मर जाता है, तो उसके बच्चों को 10 अरब मिलते हैं और जनता को कुछ नहीं मिलता। इसलिए लोगों को इस तरह के मुद्दों पर बहस और चर्चा करनी होगी। मुझे नहीं पता कि अंत में निष्कर्ष क्या निकलेगा, लेकिन जब हम संपत्ति के पुनर्आबंटन के बारे में बात करते हैं, तो हम नई नीतियों और नए कार्यक्रमों के बारे में बात कर रहे हैं जो लोगों के हित में हैं न कि केवल धन्नासेठों के हित में।’

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