सोनभद्र में फर्जी मान्यता पर चल रहा है स्कूल? RTI खुलासे से मचा हड़कंप अधिकारियों पर भी उठे सवाल।।

स्टेट हेड कार्यालय

सोनभद्र जिले के शक्तिनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत चिल्काटाड़ में संचालित “आदर्श पब्लिक स्कूल” अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी ने न केवल स्कूल की मान्यता और संचालन पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
मामला क्या है?

चोपन ब्लाक निवासी राजेश कुमार द्वारा 18 दिसंबर 2025 को दायर RTI आवेदन में स्कूल की मान्यता, भवन मानक, भूमि स्वामित्व, शिक्षकों की योग्यता और विभागीय कार्रवाई से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी गई थी। लेकिन निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब न मिलने पर मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंच गया।
*आयोग ने लिया संज्ञान*
राज्य सूचना आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 7 अप्रैल 2026 को द्वितीय अपील दर्ज की और 11 मई 2026 को सुनवाई की तिथि तय कर दी। आयोग ने संबंधित जन सूचना अधिकारी (PIO) और प्रथम अपीलीय अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
*विभाग की ‘जांच जारी’ वाली दलील*
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) सोनभद्र ने अपने पत्र में बताया कि मामले की जांच खंड शिक्षा अधिकारी, म्योरपुर को सौंप दी गई है और रिपोर्ट मांगी गई है। हालांकि, यह भी कहा गया कि रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
*उठ रहे बड़े सवाल*
इस पूरे प्रकरण में कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं:
क्या बिना मान्यता के उच्च कक्षाओं (6 से 10) का संचालन हो रहा है?
क्या विद्यालय भवन RTE और राज्य मानकों के अनुरूप है?
या स्कूल सरकारी या रेलवे भूमि पर अवैध रूप से संचालित है?
क्या वहां अयोग्य या अप्रशिक्षित शिक्षक पढ़ा रहे हैं?
पिछले 5 वर्षों में शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई?
*विभागीय लापरवाही या मिलीभगत?*
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अनियमितताएं पहले से मौजूद थीं, तो शिक्षा विभाग ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या यह केवल लापरवाही है या फिर किसी स्तर पर मिलीभगत?
कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी
आवेदक ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सही सूचना नहीं दी गई, तो आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें RTI Act, RTE Act 2009, और IPC की धारा 188 के तहत मामला और गंभीर हो सकता है।
*अब नजरें 11 मई पर*
अब सभी की निगाहें 11 मई 2026 की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि सच सामने आएगा या मामला फिर फाइलों में दब जाएगा।
*निष्कर्ष:*
यह मामला सिर्फ एक स्कूल का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा बन गया है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सोनभद्र में शिक्षा व्यवस्था की जड़ों तक हिलाने वाला खुलासा हो सकता है।

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