सोनभद्र में RTI घोटाला: ₹8500 की अवैध मांग और IGRS पोर्टल पर फर्जी निस्तारण, प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप

हेड कार्यालय उत्तर प्रदेश
सोनभद्र में RTI घोटाला: ₹8500 की अवैध मांग और IGRS पोर्टल पर फर्जी निस्तारण, प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप

सीधे की गई मुख्यमंत्री से शिकायत

सोनभद्र*, 6 अप्रैल 2026: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में एक गंभीर प्रशासनिक मामला प्रकाश में आया है, जिसमें स्थानीय अधिकारियों पर RTI अधिनियम का उल्लंघन, विभागीय आदेश की अवहेलना और वित्तीय अनियमितताओं को छुपाने के प्रयास का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को प्रार्थना-पत्र भेजकर इस मामले में उच्चस्तरीय जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

अवैध शुल्क की मांग और आदेश की अवहेलना
शिकायत के अनुसार, 11 सितंबर 2025 को RTI अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन किया गया था। इसके जवाब में 24 दिसंबर 2025 को ग्राम पंचायत सचिव ने सूचना उपलब्ध कराने के लिए ₹8500/- की अवैध राशि की मांग की। यह मांग RTI अधिनियम की धारा 7(3) के उल्लंघन में आती है।
जिला पंचायत राज अधिकारी ने 10 मार्च 2026 को आदेश जारी किया कि सूचना बिना किसी शुल्क के तीन दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाए। बावजूद इसके, अधिकारियों ने आदेश का पालन नहीं किया और केवल 646 पृष्ठ की आंशिक सूचना भेजी, जबकि प्रारंभ में 4250 पृष्ठ देने का दावा किया गया था।
IGRS पोर्टल पर फर्जी निस्तारण
शिकायतकर्ताओं ने दो IGRS शिकायतें (संख्या 40020026001156 एवं 40020026004815) दर्ज कराईं। लेकिन निस्तारण में वास्तविक मुद्दों—भ्रष्टाचार और आदेश उल्लंघन—को नजरअंदाज कर दिया गया। निस्तारण में यह झूठा तथ्य पेश किया गया कि “सूचना शुल्क जमा न करने के कारण नहीं दी गई,” जबकि शुल्क मांग पहले ही नियम विरुद्ध घोषित की जा चुकी थी।
विशेषज्ञों ने इसे फर्जी निस्तारण और सूचना को छिपाने का प्रयास बताया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह एक संगठित प्रशासनिक भ्रष्टाचार का संकेत है, जिसमें डिजिटल मंच का दुरुपयोग कर शिकायतों को दबाया गया।
RTI अधिनियम और विभागीय आदेशों का उल्लंघन
शिकायत में उल्लिखित प्रमुख उल्लंघन निम्नलिखित हैं:
धारा 7(1): सूचना 30 दिनों में न देना
धारा 7(3): विलंब से शुल्क मांगना
धारा 4(1)(b): अनिवार्य प्रकटीकरण का उल्लंघन
धारा 7(9): डिजिटल माध्यम से सूचना देने में जानबूझकर बाधा
इसके अतिरिक्त, विभागीय आदेश का जानबूझकर उल्लंघन कर सूचना का आंशिक और अप्रमाणित वितरण किया गया।
मुख्यमंत्री से की गई मांग
शिकायत में मुख्यमंत्री से अपील की गई है कि:
1. दोनों IGRS प्रकरणों की पुनः जांच कराई जाए
2. गलत निस्तारण करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए
3. अवैध शुल्क मांग को निरस्त किया जाए
4. सूचना पूरी और निःशुल्क डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाए
5. ग्राम पंचायत खेमपुर के वित्तीय अभिलेखों का विशेष ऑडिट कराया जाए
6. प्रकरण की विजिलेंस या CBCID जांच कराई जाए
7. IGRS निस्तारण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु निर्देश जारी किए जाएँ
विशेषज्ञों की राय
प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला सिर्फ सूचना के रोके जाने का नहीं बल्कि स्थानीय प्रशासन में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा है। उनका कहना है कि यदि उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई गई, तो यह न केवल RTI प्रक्रिया पर सवाल उठाएगा, बल्कि पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा देगा।
