प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमनाथ मंदिर स्वाभिमान पर्व में शामिल हुए और उन्होंने इस दौरान 108 अश्वों के साथ निकाली गई शौर्य यात्रा में भाग लिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को सोमनाथ मंदिर स्वाभिमान पर्व में शामिल हुए और उन्होंने इस दौरान 108 अश्वों के साथ निकाली गई शौर्य यात्रा में भाग लिया। यह यात्रा उन अनगिनत वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए निकाली गई, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।
इसके बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा अर्चना की और वहां एक जनसभा को संबोधित किया।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, “मैं अपना सौभाग्य मानता हूं कि मुझे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सेवा का अवसर मिला है। देश के कोने-कोने से लाखों लोग इस आयोजन से जुड़े हैं। यह समय और वातावरण अद्भुत है, एक ओर महादेव और दूसरी ओर समुद्र की लहरें, यह अद्वितीय माहौल बनाता है।”
उन्होंने आगे कहा, “इस आयोजन में गरिमा, गौरव और अध्यात्म की अनुभूति हो रही है। यहां तक कि 72 घंटों तक अनवरत ओंकार नाद और मंत्रोच्चार की आवाज भी इस वातावरण को और भी दिव्य बना रही है।” पीएम मोदी ने 1000 ड्रोन द्वारा सोमनाथ के 1000 वर्षों की गाथा के प्रदर्शन की भी तारीफ की और कहा, “यह सब मंत्र-मुग्ध कर देने वाला है, और इसे शब्दों में अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता।”
प्रधानमंत्री ने 1026 ईस्वी में महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले हमले के 1000 वर्ष पूरे होने पर टिप्पणी करते हुए कहा, “हजार साल पहले, इस स्थान पर हमारे पुरखों ने अपनी आस्था और विश्वास के लिए जान की बाजी लगाई। उन आततायियों ने सोचा था कि उन्होंने हमें जीत लिया, लेकिन आज भी सोमनाथ महादेव का मंदिर खड़ा है।”
गजनी से औरंगजेब तक इतिहास में दफन, लेकिन सोमनाथ वही खड़ा है, पीएम मोदी ने कहा। उन्होंने यह भी कहा कि गजनी और औरंगजेब जैसे आक्रांता इतिहास के पन्नों में दफन हो गए, लेकिन सोमनाथ मंदिर सागर के तट पर आज भी खड़ा है और उसकी ध्वजा पूरी सृष्टि को हिंदुस्तान की शक्ति का आह्वान कर रही है।
पीएम मोदी ने इस अवसर पर सोमनाथ के इतिहास को विजय और पुनर्निर्माण का इतिहास बताया। उन्होंने कहा, “सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का है। महादेव का एक नाम मृत्युंजय है, जिसने मृत्यु को भी जीत लिया।”
प्रधानमंत्री मोदी ने अंत में कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व सिर्फ 1000 साल पुराने विध्वंस के स्मरण का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी भारत की अस्तित्व और अभिमान का पर्व भी है। साथ ही, उन्होंने सोमनाथ के पुनर्निर्माण के 75 वर्षों की भी सराहना की।
