आस्था का महापर्व का दिन आज खरना

रेनू सागर/सोनभद्र।आस्था की प्रतीक महापर्व छट्ठ को लेकर नहाय खाय करते हैं, इस दिन ब्रती महिलाए व पुरूष नदी व तालाबों में स्नान करते हैं तथा शुद्ध भोजन ग्रहण करतें हैं।इस भोजन में आम तौर पर लौकी भात व चना दाल शामिल होती हैं जिसे सेंधा नमक और घी में बनाया जाता हैं।छट्ठ पर्व का पहला दिन जिसे नहाय खाय के नाम से जाना जाता हैं उसकी शुरुआत चैत्र या कार्तिक महीने के चतुर्थी कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होता हैं।सबसे पहले अपने अपने घरों को साफ कर पवित्र किया जाता हैं।

उसी क्रम में आज रेनू सागर शिव मंदिर (रामनगर) के सूर्य भगवान के मंदिर के सामने तालाब में ब्रती धारी महिलाओं व पुरुषों द्वारा आज के प्रथम दिनक छट्ठ महापर्व मनाने के लिए आज से शुरुआत कर दिए हैं।छट्ठ पूजा का मुख्य उद्देश्य सूर्य की उपासना कर शारिरिक मानसिक व आत्मिक शुद्धि प्राप्त करना हैं।चार दिनों तक चलने वाली इस महापर्व में खरना,सन्ध्या अर्ध्य,प्रातः कालीन अर्ध्य के साथ समाप्त हो जाता हैं।

छट्ठ पूजा के दौरान सबसे लोकप्रिय प्रसाद ठेकुआ होता हैं जो सूखा व मीठा होता हैं, गेंहू के आटे सूखे नारियल पिघली हुई चीनी और घी से बनाया जाता हैं जो पूजा के दूसरे दिन बनाया जाता हैं फिर सूर्य देव को चढ़ाया जाता हैं।

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