‘पति मुझे मार डालेगा’ सुनीता विलियम्स को किस बात का डर, स्पेस मिशन को क्यों कहा अलविदा

भारतीय मूल की प्रसिद्ध अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने 27 साल के शानदार करियर के बाद अंतरिक्ष मिशन से संन्यास ले लिया है. अमेरिसी स्पेस एजेंसी नासा ने बताया कि उनकी रिटायरमेंट 27 दिसंबर 2025, यानी क्रिसमस के तुरंत बाद प्रभावी हो गई. लेकिन उनके रिटायरमेंट से पहले एक बयान ने दुनियाभर का ध्यान खींचा.
इसमें उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था, ‘मेरा पति मुझे मार डालेगा’.
आखिर सुनीता विलियम्स को किस बात का डर था और उन्होंने स्पेस मिशन को अलविदा क्यों कहा, चलिये समझते हैं.
दरअसल, जून 2024 में बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से सुनीता विलियम्स का मिशन महज 8 दिनों का होना था. यह स्टारलाइनर का पहला क्रू मिशन था और इसे एक टेस्ट फ्लाइट के तौर पर देखा जा रहा था. लेकिन तकनीकी खराबियों के चलते मिशन तय समय पर पूरा नहीं हो सका. हालात ऐसे बने कि स्टारलाइनर बिना क्रू के वापस लौट आया और सुनीता विलियम्स को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर ही रुकना पड़ा.
क्या अंतरिक्ष स्टेशन में फंस गई थीं सुनीता विलियम्स?
यही 8 दिन का मिशन बढ़ते-बढ़ते 9 महीने से ज्यादा का हो गया. इस दौरान सोशल मीडिया और कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में ‘फंस’ गई हैं. अंग्रेजी वेबसाइट एनडीटीवी के साथ बातचीत में जब उनसे इस बारे में पूछा गया कि क्या उन्होंने खुद को फंसा हुआ महसूस किया, तो उन्होंने साफ कहा, ‘मैं खुद ऐसा महसूस नहीं करती. मुझे प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है… हम स्पेसक्राफ्ट कैसे बनाते हैं, कैसे लॉन्च करते हैं और कैसे फैसले लेते हैं.’
नासा भी इस मिशन को असफल नहीं मानता. एजेंसी के अनुसार, स्टारलाइनर मिशन में आई दिक्कतें भविष्य के कमर्शियल स्पेस मिशनों के लिए अहम सबक साबित हुईं. खुद सुनीता ने कहा कि वे पहले से जानती थीं कि यह एक टेस्ट फ्लाइट है और इसमें दिक्कतें आ सकती हैं. ऐसे में ISS क्रू का हिस्सा बनना योजना का ही हिस्सा था.
‘मेरा पति मुझे मार डालेगा’
इसी दौरान जब उनसे पूछा गया कि नासा चांद पर एक मानवीय मिशन भेजने की तैयारी कर रहा है. क्या वह भी इस मिशन पर जाना चाहेंगी? तो इस पर सुनीता विलियम्स ने हल्के-फुल्के अंदाज में हंसते हुए कहा, ‘बिल्कुल मैं चांद पर जाना चाहूंगी. लेकिन मेरा पति मुझे मार डालेगा.’
सुनीता विलियम्स का यह बयान उनके परिवार की चिंता और मिशन की अनिश्चितता को लेकर एक भावनात्मक, लेकिन मजाकिया प्रतिक्रिया थी. इससे साफ होता है कि सुनीता विलियम्स न तो घबराई हुई थीं और न ही खुद को असहाय मानती थीं.
सुनीता विलियम्स के नाम दर्ज कई रिकॉर्ड
नासा एडमिनिस्ट्रेटर ने उनके रिटायरमेंट पर कहा कि सुनीता विलियम्स मानव अंतरिक्ष उड़ान की अग्रदूत रही हैं. उनके नेतृत्व ने न सिर्फ लो-अर्थ ऑर्बिट में कमर्शियल मिशनों का रास्ता खोला, बल्कि आर्टेमिस मिशन के जरिए चांद और मंगल की ओर बढ़ने की नींव भी रखी.
1998 में नासा के लिए चुनी गईं सुनीता विलियम्स ने तीन स्पेस मिशन में कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए, जो किसी भी नासा एस्ट्रोनॉट के लिए दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है. उन्होंने इस दौरान 9 स्पेसवॉक किए, जिनकी कुल अवधि 62 घंटे 6 मिनट रही. यह किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा किया गया सबसे बड़ा रिकॉर्ड है. वे अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली दुनिया की पहली इंसान भी बनीं.
सुनीता विलियम्स ने क्यों लिया संन्यास?
उनका अंतिम मिशन मार्च 2025 में पृथ्वी पर लौटने के साथ पूरा हुआ. इसके बाद उन्होंने यह फैसला लिया कि अब नई पीढ़ी के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए रास्ता खोलने का समय आ गया है. खुद सुनीता कहती हैं कि अंतरिक्ष उनका ‘सबसे पसंदीदा स्थान’ रहा है, लेकिन अब चांद और मंगल की ओर बढ़ते मानव मिशनों में उनकी भूमिका एक प्रेरणा के रूप में रहेगी.
गुजरात के मेहसाणा जिले से ताल्लुक रखने वाले पिता की बेटी सुनीता विलियम्स आज सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्री नहीं, बल्कि साहस, भरोसे और वैज्ञानिक समर्पण की मिसाल बन चुकी हैं. उनका रिटायरमेंट किसी डर का नतीजा नहीं, बल्कि एक गौरवशाली अध्याय के सम्मानजनक समापन की कहानी है.
