माता शबरी के जूठे बेर ग्रहण कर प्रभु राम ने सामाजिक समरसता का संदेश दिया : बृजेश जी।
माता शबरी के जूठे बेर ग्रहण कर प्रभु राम ने सामाजिक समरसता का संदेश दिया : बृजेश जी।
क्षणिक लाभ के लिए धर्म से विमुख होने पर समाज का भविष्य सुरक्षित नहीं रहता : पंडित विजयलक्ष्मी शुक्ला।
हिन्दू सम्मेलन में भारत माता पूजन, महाप्रसाद व भव्य भंडारा, राजकिशन बस्ती में उमड़ा हिन्दू समाज
शक्तिनगर में आयोजित सम्मेलन में संघ शताब्दी यात्रा, हिन्दू संस्कृति, नारी शक्ति और सामाजिक समरसता पर हुआ व्यापक मंथन

संवाददाता राजू यादव क्राइम न्यूज़ जिला सोनभद्र
शक्तिनगर (सोनभद्र)।
सोनभद्र जनपद के शक्तिनगर स्थित राजकिशन बस्ती में शुक्रवार को भव्य हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन की शुरुआत भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन, दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण के साथ हुई। इसके पश्चात वक्ताओं के आशीर्वचन संपन्न हुए और अंत में भारत माता की भव्य महाआरती आयोजित की गई। महाआरती के उपरांत महाप्रसाद का वितरण एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं एवं नागरिकों ने सहभागिता की।
सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सोनभद्र विभाग के संपर्क प्रमुख बृजेश जी उपस्थित रहे। उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिन्दू धर्म विश्व का एकमात्र ऐसा धर्म है जो सर्वे भवन्तु सुखिनः और सर्वे भद्राणि पश्यन्तु जैसी सार्वभौमिक कल्याण की भावना सिखाता है। उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म में यह विचार नहीं मिलता कि पराई स्त्री को माता का स्वरूप माना जाए।
उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म में विवाह सात जन्मों का पवित्र बंधन होता है तथा अर्धनारीश्वर की पूजा नारी-पुरुष समानता का प्रतीक है। भगवान श्रीराम ने गिरिवासी और वनवासी समाज को एकजुट कर त्रिलोक विजयी रावण का संहार किया। माता शबरी के जूठे बेर ग्रहण कर प्रभु राम ने सामाजिक समरसता का संदेश दिया। वहीं भगवान जगन्नाथ द्वारा कर्मा बाई के घर खिचड़ी ग्रहण करने का प्रसंग हिन्दू धर्म की बंधुत्व भावना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि धर्म का पालन करने से ही मनुष्य को सर्वोच्च सम्मान प्राप्त होता है और किसी के बहकावे में आकर धर्म त्यागना उचित नहीं है।
सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे एनसीएल खड़िया क्षेत्र के परियोजना अधिकारी राकेश अवस्थी ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करते हैं। सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और आपसी सहयोग से ही एक समृद्ध और सशक्त समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि हिन्दू सम्मेलन समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम है।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पं. विजय लक्ष्मी शुक्ला ‘संवेदना दीदी’ ने कहा कि हमारे रग-रग में हमारे पूर्वजों का रक्त बहता है। जब हमारे पूर्वजों ने धर्म नहीं बदला, तो आज हमें भी धर्म परिवर्तन के बारे में सोचना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को अच्छा इंसान बनाना है तो उन्हें धर्म और संस्कारों से जोड़ना आवश्यक है। क्षणिक लाभ के लिए धर्म से विमुख होने पर समाज का भविष्य सुरक्षित नहीं रह सकता।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ईसाई धर्म के फादर कामिल बुल्के ने जब रामचरितमानस जैसे त्याग और आदर्श के ग्रंथ का अध्ययन किया, तो उन्होंने ईसाई धर्म त्याग कर हिन्दू धर्म को अपनाया। यह हिन्दू धर्म की महानता का प्रमाण है।
सभा में उपस्थित मातृशक्तियों का आह्वान करते हुए वक्ताओं ने कहा कि नारी शक्ति ही धर्म को दृढ़ता प्रदान करने वाली देवियां हैं। हिन्दू धर्म के जीवन-शैली, खानपान और परंपराओं में गहरी वैज्ञानिकता है। परिवार और पुरोधों को संभालने वाली आदि शक्ति स्वयं मातृशक्ति है। इसलिए धर्मांतरण जैसे षड्यंत्रों से समाज की रक्षा का दायित्व भी मातृशक्ति को निभाना होगा।
माँ ज्वालामुखी धाम के मुख्य पुजारी श्लोकी प्रसाद मिश्रा ने अपने उद्बोधन में कहा कि हिन्दू धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि सम्पूर्ण जीवन पद्धति है। इसमें जीवन, खानपान, संस्कार और विज्ञान का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।
कार्यक्रम का संचालन सत्यप्रकाश सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन नरेंद्र भूषण शुक्ला ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से प्रमोद तिवारी, हीरालाल, प्रशांत श्रीवास्तव, यश बंसल, रंजीत सिंह राजपूत, सनोज़ सिंह, पंकज चौबे, अभय सिंह, अमरेश पाण्डेय, नंदलाल, राघवेंद्र प्रताप सिंह, पंडित मुकेश मिश्रा, राजू ठाकुर, आशीष कुमार, गुप्तेश्वर सोनी, मोहन गुप्ता, छठीलाल केसरवानी, खुशहाल सिंह, चंद्रशेखर जी सहित सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित रहे।
शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न इस हिन्दू सम्मेलन ने क्षेत्र में संगठन, संस्कार और संस्कृति के प्रति नई चेतना का संचार किया।
