बेटा बना आईएएस,मां नहीं समझ पाईं- आईएएस क्या है

रायबरेली: संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट आते ही कहीं खुशियां तो कहीं मायूसी दिखाई दी. मगर, जिन लोगों ने सफलता पाई उनमें से कई ऐसे लोग भी हैं, जिनकी कहानी जानकर गर्व महसूस होता है.
ऐसा ही एक नाम है विमल कुमार. रायबरेली के एक छोटे से गांव चांदेमऊ के रहने वाले विमल कुमार ने 107वीं रैंक हासिल कर परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है. पिता रामदेव भट्ठे पर मजदूरी करते हैं, तो वहीं मां गृहिणी हैं. दोनों ही माता-पिता अशिक्षित हैं. मगर, इनके लाल ने आज इनका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया. विमल ने अपनी मेहनत और मेधा से यह सफलता हासिल की है. लगातार प्रयास करने के बाद सफलता मिली तो परिवार में खुशी छा गई.
विमल कुमार का एक भाई पुष्पेंद्र कुमार और दूसरा भाई अजीत (गोलू) है. दो बहनों मीरा और आरती की शादी हो चुकी है. परिवार के पास महज एक बीघा जमीन है. ऐसी हालत में विमल कुमार का सिविल सेवा परीक्षा में सफल होना सराहनीय है. पांचवें प्रयास में उन्हें यह सफलता मिली है. चौथे प्रयास में साक्षात्कार के बाद 12 अंकों से पीछे रह गए थे.
उन्होंने प्राइमरी शिक्षा गांव के ही स्कूल से की. इसके बाद नवोदय विद्यालय में चयन हो गया, जहां से हाईस्कूल तक पढ़ाई की. दक्षिणा फाउंडेशन से छात्रवृत्ति मिली तो जवाहर नवोदय से ही इंटर की पढ़ाई करने केरल चले गए. आईआईटी दिल्ली से बीटेक किया. इसके बाद सिविल सेवा की तैयारी में लग गए. विमल कुमार को मिली सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है और बधाई देने वालों का तांता लगा है.
मां नहीं समझ पाईं- आईएएस क्या है
यूपीएससी में 107वीं रैंक पाने वाले विमल ने बताया कि जब उनका रिजल्ट आया तो उनकी मां समझ ही नहीं पाई. उन्होंने कहा, मां! मैं आइएएस बन गया…, तब मां सिंयावती कुछ देर तक उनका चेहरा निहारती रहीं. मां को ऐसे देख उन्होंने फिर कहा, मैं अफसर बन गया मां. इतना सुनते ही मां के चेहरे पर चमक आ गई और भीगे नेत्रों के साथ बेटे को गले लगा लिया. परिवार में पहली बार कोई इतना पढ़ा है.
वह बताते हैं, ‘पिता किसान और मां गृहिणी हैं. फिर भी वह चाहते थे कि उनका बेटा कुछ बड़ा करे. गांव में घर के पास लगा ट्रांसफार्मर अक्सर जल जाता था. सही होने में कई दिन लग जाते थे. इससे बहुत दिक्कत होती थी. इसलिए भागीदारी भवन गोमती नगर आकर तैयारी शुरू की. पांचवीं बार में 107 आल इंडिया रैंक मिली.
इन लोगों को भी मिली सफलता
एक और किसान परिवार के विपिन देव यादव ने भी सफलता पाते हुए 316वीं रैंक प्राप्त की है. अंबेडकरनगर के विपिन बताते हैं- मैं तैयारी के साथ गोमती नगर के भागीदारी भवन में यूपीपीसीएस मुख्य परीक्षा 2024 के 150 से ज्यादा अभ्यर्थियों को एक साल पढ़ाता भी रहा. वहीं सुभाष नगर निवासी ऋषभ यादव ने सिविल सेवा परीक्षा में 132वीं रैंक हासिल की है. उन्हें यह सफलता दूसरे प्रयास में मिली. उनके पिता नरेंद्र कुमार यादव इसी जिले के रुस्तमपुर स्थित गायत्री इंटर काॅलेज में शिक्षक हैं, जो मूलत: कानपुर के रहने वाले हैं.
